बढ़ती गर्मी के कारण दुनियाभर में जहरीली हो रही हवा
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वभर में हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। 1990 के दशक की तुलना में आग के धुएं की घटनाएं तीन गुना बढ़ गई हैं, जिससे 2010 से 2018 के बीच हर साल एक लाख अतिरिक्त मौतें हुईं। जलवायु परिवर्तन के कारण वायु गुणवत्ता मानकों को पाना और भी मुश्किल हो गया है।

डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट, भारत सहित पूरी दुनिया में हवा की गुणवत्ता खराब हो रही भीषण गर्मी और जंगलों में लगने वाली आग से पैदा होने वाला प्रदूषण बढ़ रहा
बढ़ती आग के धुएं
1990 के दशकों की तुलना में आग के धुएं की घटनाएं तीन गुना बढ़ गई हैं
इसके कारण 2010 से 2018 के बीच हर साल एक लाख अतिरिक्त मौतें हुईं
जेनेवा, एजेंसी। बढ़ती भीषण गर्मी और जंगलों में लग रही विनाशकारी आग से दुनिया भर की हवा तेजी से जहरीली हो रही है। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी डब्ल्यूएमओ ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है।
वायु प्रदूषण का संकट
डब्ल्यूएमओ ने कहा है कि संकट वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और लोगों की सेहत सुधारने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों पर पानी फेर रहा है। जलवायु परिवर्तन के चलते डब्ल्यूएचओ के वायु गुणवत्ता मानकों को पाना अब और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
जलवायु और वायु प्रदूषण का संबंध
रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन आपस में गहराई से जुड़े हैं। इन्हें अलग-अलग करके देखने के बजाय समन्वित नीति बनाकर हल करने की जरूरत है। उद्योग और परिवहन पर सख्त नियमों के कारण भले ही कई विकसित देशों में उत्सर्जन कम हुआ हो, लेकिन जंगलों की आग प्रदूषण का नया और बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। डब्ल्यूएमओ के वैज्ञानिक लोरेंजो लैब्रेडोर ने कहा कि आपका शहर या क्षेत्र कितना भी साफ क्यों न हो, अगर आसपास के जंगलों की आग का धुआं वहां पहुंचता है, तो वह वहां की हवा को बुरी तरह प्रदूषित कर देगा।
हवा में बढ़ते सूक्ष्म कण
रिपोर्ट में पीएम2.5 और ग्राउंड-लेवल ओजोन के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर चिंता जताई गई है, जो दिल और सांस की जानलेवा बीमारियों का मुख्य कारण हैं। इसके अलावा ब्लैक कार्बन और माइक्रोप्लास्टिक्स जैसे प्रदूषकों की बेहतर ट्रैकिंग की मांग की गई है।
पीएम2.5 क्या है ?
पीएम2.5 का मतलब है बहुत बारीक कण जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं और खून में मिल सकते हैं। डब्ल्यूएमओ ने PM2.5 को सेहत के लिए बड़ा खतरा बताया है।
आग के जहरीले धुएं की घटनाएं
रिपोर्ट में शामिल एक अध्ययन के मुताबिक, 1990 के दशक की तुलना में आग के जहरीले धुएं की घटनाएं तीन गुना बढ़ गई हैं। इसके कारण 2010 से 2018 के बीच दुनिया भर में हर साल लगभग एक लाख अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं।
भारत सहित कई देश प्रभावित
2025 में अत्यधिक आग लगने के कारण उत्तरी कनाडा, रूस के हिस्सों और मध्य-पश्चिमी अफ्रीका में पीएम2.5 का स्तर सामान्य से काफी ऊपर रहा। वहीं स्पेन, फ्रांस और ग्रीस जैसे यूरोपीय देशों में भीषण गर्मी के बाद उत्तर-पश्चिमी स्पेन आग की चपेट में रहा।
भारत में भी पराली व लकड़ी जलाने से फैले प्रदूषण के कारण पीएम 2.5 के स्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आग से निकलने वाले सूक्ष्म कणों में खतरनाक रसायन होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में जाकर फेफड़ों और पूरे शरीर में गंभीर सूजन पैदा करते हैं।
एरोसोल और माइक्रोप्लास्टिक की चुनौती
वातावरण में तैरने वाले कण महाद्वीपों को पार कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, बर्फ और ग्लेशियरों पर ब्लैक कार्बन के जमने से सूरज की रोशनी को परावर्तित करने की क्षमता घटती है, जिससे बर्फ तेजी से पिघलती है। वहीं, वातावरण में फैल रहे माइक्रोप्लास्टिक भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिनकी बेहतर ट्रैकिंग की आवश्यकता है।
रिपोर्ट की कुछ अहम बातें
-जमीन पर लगभग 5.1 करोड़ टन माइक्रोप्लास्टिक मौजूद है।
-समुद्र में लगभग 2.2 करोड़ टन माइक्रोप्लास्टिक
सुझाव
-वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से अलग-अलग निपटने के बजाय एक साथ मिलकर समन्वित नीतियां बनाने की जरूरत है।
-वायुमंडलीय प्रदूषकों, पीएम2.5, ग्राउंड-लेवल ओजोन, ब्लैक कार्बन और माइक्रोप्लास्टिक की ट्रैकिंग और निगरानी को अधिक मजबूत और व्यापक बनाएं
- वायु गुणवत्ता की नीतियों में केवल शहरों, उद्योगों और वाहनों के उत्सर्जन को ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही जंगलों की आग और हीटवेव जैसे खतरों को भी शामिल करना।


