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क्या तालिबान की बर्बरता से मिलेगी आजादी? अमेरिका के रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी निगाहें

क्या तालिबान की बर्बरता से मिलेगी आजादी? अमेरिका के रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी निगाहें

संक्षेप:

अफगानिस्तान में शनिवार को हजारों लोग इस बात का इंतजार करते रहे कि अमेरिका यहां सभी अमेरिकियों और संघर्ष के दौरान मदद करने वाले सभी अफगानों को सुरक्षित निकालने के राष्ट्रपति जो बाइडेन के नए वादे को...

Aug 21, 2021 02:00 pm ISTHimanshu Jha एपी, काबुल।
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अफगानिस्तान में शनिवार को हजारों लोग इस बात का इंतजार करते रहे कि अमेरिका यहां सभी अमेरिकियों और संघर्ष के दौरान मदद करने वाले सभी अफगानों को सुरक्षित निकालने के राष्ट्रपति जो बाइडेन के नए वादे को पूरा करता है या नहीं। इस दौरान अमेरिकी हेलीकॉप्टरों को खचाखच भरे काबुल हवाईअड्डे और इसके रास्ते में आने वाले तालिबान के जांच बिंदुओं के अतिरिक्त दूसरी जगहों से लोगों को निकालते हुए देखा गया।

बाइडेन की अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह वापसी की 31 अगस्त की समय-सीमा नजदीक आती जा रही है और राष्ट्रपति ने शुक्रवार रात तक इसे बढ़ाने के बारे में कोई बात नहीं की। हवाईअड्डे के बाहर हो रही हिंसा और अफरा तफरी के वीडियो सामने आने के बीच बाइडेन की आलोचना हो रही है। तालिबान के बदले से खौफजदा अफगान लोग गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें यहां छोड़कर नहीं जाया जाए।

बहरीन ने शनिवार को घोषणा की कि वह लोगों के बचाव के लिए विमानों को अपनी पारगमन सुविधाओं का इस्तेमाल करने की इजाजत देगा। इस विकल्प से दबाव थोड़ा कम हो सकता है क्योंकि शुक्रवार को कतर में एयर बेस पर जगह की कमी पड़ने लगी, इसी वजह से काबुल हवाईअड्डे पर उड़ानों को कई घंटों तक रोकना पड़ रहा है।

इस बीच संयुक्त अरब अमीरात ने शनिवार को कहा कि वह 5,000 अफगानों को अन्य देशों के लिए रवाना होने तक अपने यहां रूकने देगा। एक रक्षा अधिकारी ने शुक्रवार को कहा था कि 250 अमेरिकियों समेत करीब 5,700 लोगों को 16 सी-17 विमानों के जरिए काबुल से निकाला गया। 

अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि भी की कि अमेरिकी सेना के हेलीकॉप्टर 169 अमेरिकियों को निकालने के लिए काबुल से आगे भी गए। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अफगानिस्तान में कितने अमेरिकी नागरिक अभी हैं, लेकिन अनुमान है कि इनकी संख्या 15,000 तक हो सकती है।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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