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3 अप्रैल, 2021|8:12|IST

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ऑस्ट्रेलिया में फेसबुक को अपने फैसले पर होगा बाद में पछतावा? जानिए इस मामले पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

रेवन्यू शेयरिंग विवाद के मामले में ऑस्ट्रेलियाई सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के बीच में ठन गई है। फेसबुक द्वारा ऑस्ट्रेलिया में वहां की खबरों को यूजर्स को नहीं दिखाए जाने के बाद मामला और बढ़ता जा रहा है। पिछले लंबे समय से अमेरिका, भारत समेत कई देशों में फेसबुक का विवादों के साथ चोली-दामन जैसा साथ रहा है और इस मसलों पर वह डिफेंसिव मोड पर आता रहा है। उस पर हेट स्पीच को बढ़ावा देने, लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने, प्राइवेसी कानूनों का उल्लंघन करने आदि के आरोप लगते रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया में फेसबुक के कदम उठाने के पीछे वह कानून है, जिसकी वजह से उसे न्यूज स्टोरीज का इस्तेमाल करने के लिए पब्लिशर्स को पेमेंट करना पड़ेगा। ऐसे में उसने न्यूज को ब्लॉक करने का कदम उठाकर इससे आसानी से पीछा छुड़ाने का फैसला लिया है। दुनियाभर के मीडिया एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग का यह फैसला चौंकाने वाला है।  

सिरैक्यूज यूनिवर्सिटी में सोशल मीडिया एक्सपर्ट और प्रोफेसर जेनिफर ग्रिगेल का कहना है कि जकरबर्ग का यह कदम दिखाता है कि कैसे वह अकेले ही न्यूज को दुनिया तक पहुंचाने में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। किसी भी कंपनी का पत्रकारिता की पहुंच पर इतना अधिक प्रभाव नहीं होना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया की जनता अब फेसबुक पर वहां से जुड़ी खबरों के लिक्स नहीं प्राप्त कर सकेगी।

ऑस्ट्रेलिया से बाहर भी सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड जैसे ऑस्ट्रेलियाई न्यूज सोर्स का लिंक पोस्ट नहीं कर सकेगा। फेसबुक का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह कानून पब्लिशर्स के साथ अपने संबंधों की वास्तविकताओं को नजरअंदाज करता है, जो दुनिया भर में उनकी स्टोरीज को प्रसारित करने के लिए अपनी सेवा का उपयोग करते हैं।

इस मामले में टेक्नोलॉजी और मीडिया एक्सपर्ट्स ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वर्ल्ड वाइड वेब को इन्वेंट करने वाले ब्रिटिश कंप्यूटर साइंटिस्ट टिमोथी बर्नर्स ली ने जनवरी में ऑस्ट्रेलियाई सीनेट कमेटी को बताया था कि हमेशा से फ्री रहे लिंक्स पर पेमेंट लागू करने का फैसला इंटरनेट को बर्बाद कर सकता है। कानून को लेकर टेक्नोलॉजी कंपनियों, ऑस्ट्रेलियाई सरकार और देश के मीडिया दिग्गजों के बीच अभी भी बातचीत चल रही है।

फेसबुक ने ऑस्ट्रेलियाई न्यूज को ब्लॉक करने के अपने फैसले को लेकर कोई भी चेतावनी नहीं दी थी और बैन लगा दिया, जिससे उन लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिनका इससे कोई मतलब नहीं था। फेसबुक की प्रवक्ता मारी मेलगुइजो ने कहा कि कानून न्यूज कॉन्टैंट की परिभाषा पर एक स्पष्ट जानकारी नहीं देता है। हमने कानून का मसौदा तैयार करने के लिए एक व्यापक परिभाषा ली है।" वहीं, नॉट्रे डेम-आईबीएम टेक्नोलॉजी एथिक्स लैब की निदेशक एलिजाबेथ रेनिरीस ने कहा कि फेसबुक के रिएक्शन को तब भी जायज नहीं ठहराया जा सकता, जब कानून के साथ भी कोई समस्या हो। फेसबुक ने अपनी ताकत दिखाई है।

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  • Web Title:Will Facebook regret its decision in Australia later Know what the experts say on this matter