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न्याय की हत्या हुई; पाकिस्तान में पूर्व PM की फांसी पर 45 साल बाद क्यों SC में बहस, मानी जा रही गलती

मांग की जा रही है कि भले ही भुट्टो की जिंदगी नहीं लौटाई जा सकती, लेकिन उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले की तो समीक्षा हो। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया है कि सोमवार तक इस मामले में बहस समाप्त होगी।

न्याय की हत्या हुई; पाकिस्तान में पूर्व PM की फांसी पर 45 साल बाद क्यों SC में बहस,  मानी जा रही गलती
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,इस्लामाबादThu, 29 Feb 2024 01:50 PM
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पाकिस्तान में इन दिनों 45 साल पहले पूर्व पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो को दी गई फांसी की सजा पर बहस हो रही है। लंबे अरसे से भुट्टो की फांसी के फैसले को गलत बताया जाता रहा है और अब इस मामले में अर्जी दाखिल की गई तो 9 जजों की संवैधानिक बेंच में बहस चल रही है। मांग की जा रही है कि भले ही जुल्फिकार अली भुट्टो की जिंदगी नहीं लौटाई जा सकती, लेकिन उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले की तो समीक्षा हो। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया है कि सोमवार तक इस मामले में बहस समाप्त हो सकती है। इस बीच बुधवार को सुनवाई हुई तो अदालत में एमिकस क्यूरी यानी न्याय मित्र के तौर पर पेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मंजूर मलिक ने इसे न्याय की हत्या करार दिया।

उन्होंने कहा कि यह ट्रायल ऑफ मर्डर नहीं था बल्कि मर्डर ऑफ ट्रायल था। उन्होंने अदालत से अपील की कि वह इस ऐतिहासिक गलती में सुधार करे। केस की सुनवाई चीफ जस्टिस काजी फैज इसा की अगुवाई वाली 9 जजों की बेंच कर रही है। जुल्फिकार अली भुट्टो को लाहौर हाई कोर्ट ने 18 मार्च, 1979 को फांसी की सजा दी थी। उन्हें पीपीपी के संस्थापक सदस्यों में से एक अहमद रजा कसूरी की हत्या का आदेश देने पर यह सजा दी गई थी। इस फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी 4-3 के बहुमत से बरकरार रखा था और जिया उल हक के शासनकाल में उन्हें 4 अप्रैल, 1979 को ही फांसी दे दी गई थी। 

जुल्फिकार अली भुट्टो को पसंद करने वालों की पाकिस्तान में बड़ी तादाद रही है। खासतौर पर उनकी पार्टी पीपीपी के समर्थक उनमें शामिल हैं। 2008 से 2013 के दौरान पाकिस्तान में जब पीपीपी की हुकूमत थी तो आसिफ अली जरदारी ने भुट्टो को मिली फांसी की सजा पर समीक्षा की अर्जी डाली थी। बता दें कि आसिफ अली जरदारी राष्ट्रपति रहे हैं और वह जुल्फिकार अली भुट्टो के दामाद हैं। भुट्टो के नाती बिलावल भुट्टो जरदारी भी राजनीति में हैं। जुल्फिकार की तरह ही उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो की भी सरेआम हत्या कर डाली गई थी। 

इस मामले में बुधवार को बहस हुई तो एमिकस क्यूरी ने भुट्टो को मिली सजा पर सवाल उठाए। उन्होंने एक अहम सवाल उठाते हुए कहा कि कसूरी की हत्या का आदेश देने का आरोप भुट्टो पर लगता है। लेकिन जब केस चला तो एक गवाह मसूद महमूद का बयान ले लिया गया और उन्होंने माना कि भुट्टो ने आदेश दिया था। लेकिन दूसरे गवाह का बयान नहीं लिया गया क्योंकि उसका दावा कुछ अलग था। उन्होंने कहा कि मसूद महमूद भी उसी जिले का था, जहां के कसूरी थी। ऐसे में अदालत को यह समझना चाहिए था कि उनकी गवाही में पक्षपात भी हो सकता है। हालांकि इस पर जज ने कहा कि कई बार एक ही इलाके के रहने वाले लोगों में मतभेद होते हैं और यहां तक कि दुश्मनी भी हो जाती है।

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