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पाकिस्तान पर क्यों US मेहरबान, 15 साल बाद बड़े पैकेज संग लौटा बलूचिस्तान; जानें- 4 मोर्चों पर कैसे छिड़ने जा रही जंग?

Pakistan USA Balochistan: पिछले महीने अमेरिकी राजदूत ने ग्वादर का दौरा किया था और हाल ही में 20 नवंबर को फिर से उन्होंने क्वेटा का दौरा किया और प्रांतीय मुख्यमंत्री से मुलाकात की है।

पाकिस्तान पर क्यों US मेहरबान, 15 साल बाद बड़े पैकेज संग लौटा बलूचिस्तान; जानें- 4 मोर्चों पर कैसे छिड़ने जा रही जंग?
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 28 Nov 2023 12:19 PM
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हाल ही में पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत डोनाल्ड ब्लूम ने दक्षिणी-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा का दौरा किया था। अपनी यात्रा के दौरान ब्लूम ने पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में 40 लाख डॉलर यानी 114 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की आर्थिक सहायता पैकेज का ऐलान किया।

यह धनराशि पाकिस्तान के पुलिस बलों के लिए प्रशिक्षण और अन्य क्षमता निर्माण पर खर्च की जाएगी। इसके अलावा,  800 अतिरिक्त लोगों को शिक्षित और प्रशिक्षित करने के लिए भी इस राशि का इस्तेमाल किया जाएगा। दरअसल, अमेरिका आंतरिक और सीमा पार आतंकवाद से निपटने, बलूचिस्तान में अपनी स्थिति को मजबूत करने और उस क्षेत्र में चीन की उपस्थिति को नियंत्रित करने की एक महत्वपूर्ण पहल के साथ इस क्षेत्र में वापसी कर रहा है।

पिछले महीने अमेरिकी राजदूत ने ग्वादर का दौरा किया था और हाल ही में 20 नवंबर को फिर से उन्होंने क्वेटा का दौरा किया और प्रांतीय मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसी दौरे पर अमेरिकी राजदूत ने बलूचिस्तान के विकास के लिए 4 मिलियन डॉलर की घोषणा की। अपनी यात्रा पर ब्लूम ने कहा कि दोनों देश पिछले कुछ समय से आतंकवाद से निपटने के लिए मिलकर काम करते रहे हैं,और आगे भी सहयोग बना रहेगा। 

15 साल बाद बलूचिस्तान की तरफ मुड़ा अमेरिका
बता दें कि 15 साल की अनदेखी के बाद, अमेरिका फिर से चीन और उसके सीपीईसी प्रोजेक्ट को रोकने के लिए बलूचिस्तान में कूद पड़ा है। ब्लूम का बलूचिस्तान दौरा यह दर्शाता है कि क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने के लिए ही अमेरिका ने महत्वपूर्ण ग्वादर बंदरगाह में अधिक रुचि ली है। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर ग्वादर पोर्ट का होना रणनीतिक और व्यापारिक नजरिए से बहुत अच्छा स्थान है। दूसरी तरफ यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।

ग्वादर के जरिए चीन तक पहुंच
बलूचिस्तान में अमेरिकी राजदूत की यात्रा और आर्थिक पैकेज के ऐलान को अमेरिका द्वारा चीन तक पहुंचने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका की रुचि इस क्षेत्र में कम हो चुकी थी लेकिन सीपीईसी लागू होने के बाद से पाकिस्तान में, खासकर बलूचिस्तान में चीन की ताकत बहुत बढ़ गई है। इसलिए, ग्वादर बंदरगाह पर अमेरिकी राजदूत की यात्रा अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

ग्वादर का क्या महत्व?
अरब सागर के किनारे बसा ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और पड़ाव है। यह चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल की एक प्रमुख परियोजना का हिस्सा है। ग्वादर बंदरगाह, होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर बसा है और यह व्यापार से लेकर भू-राजनीति और सामरिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है। यहां पाकिस्तान, चीन और अमेरिका असीमित संभावनाएं देख रहे हैं।

दुनिया इस एक गहरे समुद्री बंदरगाह के रूप में भी देखती है, जिसे पाकिस्तान ने 2007 में खोला था लेकिन ग्वादर का विकास इस तथ्य से धीमा हो गया है कि यहां के युवाओं के पास कई कौशल और शैक्षणिक विकल्प और करियर की संभावनाएं नहीं हैं। कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास और ग्रामीण सामुदायिक विकास परिषद ने अब यहां मिलकर इंग्लिश एक्सेस माइक्रोस्कॉलरशिप कार्यक्रम की शुरुआत की है।

माइक्रोस्कॉलरशिप कार्यक्रम क्या है
इस परियोजना के तहत ग्वादर के 48 गरीब लेकिन प्रतिभाशाली बच्चे जो मध्य विद्यालय स्तर के विद्यार्छी हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक कक्षा का अनुभव करने में सक्षम होंगे। एक सामाजिक कार्यकर्ता के मुताबिक, अमेरिका इस परियोजना के जरिए स्थानीय समुदाय को अधिक शक्ति देने और स्कूल के विकास में सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अलावा, राजदूत ब्लोम की ग्वादर यात्रा क्वेटा में एक बड़ी घोषणा के बाद हो रही है।

बलूचिस्तान में चार मोर्चे पर हो सकती है जंग
कुछ रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र में अमेरिका के प्रवेश से एक तरफ बलूच विद्रोहियों और अलगाववादियों का विद्रोह बढ़ेगा और दूसरी तरफ बलूचिस्तान में चीन और अमेरिका के छद्म युद्ध की वजह से तालिबान के खिलाफ एक शून्य पैदा होगा। हालाँकि, ग्वादर एक बेहतरीन स्थान पर है और अपनी भू-रणनीतिक स्थिति और समुद्री बंदरगाह के कारण इसमें काफी संभावनाएं हैं।

चूंकि, ग्वादर के विकास में चीन पहले से लगा हुआ है और अब अमेरिका ने भी एंट्री ली है। ऐसे में यह क्षेत्र एक आर्थिक हब बनकर भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालंकि, इस व्यापारिक और सामरिक लड़ाई में वह चीन और अमेरिका की व्यापारिक लड़ाई का अखाड़ा भी बन सकता है।

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