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अमेरिका के जाने के बाद अफगानिस्तान में क्यों फंसा महसूस कर रहा भारत?

हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Aditya Kumar
Thu, 22 Jul 2021 05:36 PM
अमेरिका के जाने के बाद अफगानिस्तान में क्यों फंसा महसूस कर रहा भारत?

अमेरिका ने जब से अफगानिस्तान छोड़ने की बात की है, तब से भारत की दिक्कतें बढ़ गई है। अमेरिका ने इस साल 11 सितंबर तक अपनी सेना का अफगानिस्तान से वापसी का लक्ष्य रखा हुआ है। अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ने के साथ ही तालिबान का फिर से अफगानिस्तान के बड़े इलाके पर कब्ज़ा हो गया है। दुनियाभर के डिफेंस एक्सपर्ट और एनालिस्ट यह मान रहे हैं कि ऐसा ही रहा तो जल्द ही अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्ज़ा हो जाएगा। ऐसे में भारत की अपनी मुश्किलें हैं, क्योंकि भारत, अफगानिस्तान सरकार को जनता का प्रतिनिधि मानती रही है और तालिबान को आतंकी संगठन की तरह देखती रही है।

भारत के कई प्रोजेक्ट्स आधे-अधूरे

तालिबान के बढ़ते कदम को देखते हुए भारत ने अफगानिस्तान के अपने अधिकतर कांसुलेट्स बंद कर दिए हैं। भारत सरकार अफगानिस्तान में काम कर रहे भारतीय नागरिकों को भारत वापस बुला रही है। जो लोग अब भी वहां फंसे हुए हैं, उनके लिए सुरक्षित रहने को गाइडलाइंस जारी कर रही है। भारत ने अफगानिस्तान के विकास में बहुत काम किए हैं। इसमें सबसे प्रमुख अफगानिस्तान की संसद बनाने का काम है। भारत ने अफगानिस्तान में कई स्कूल सहित सड़कें, नहरें सहित कई प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। कई प्रोजेक्ट्स अभी भी अधूरे हैं। यह सभी काम भारत ने अफगानिस्तान सरकार के साथ मिलकर किए हैं।

भारत का अफगानिस्तान में भविष्य?

भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर तालिबान से अब तक कोई बात नहीं की है। हालांकि पर्दे के पीछे बातचीत की रिपोर्ट्स आती रही हैं लेकिन विदेश मंत्रालय इन बातों का खंडन करती रही है। कई अमेरिकी राजनयिकों ने भारत को तालिबान से सीधे बात करने की सलाह दी है। लेकिन सच यह भी है कि अफगानिस्तान की आम जनता चाहती है कि भारत तालिबान का साथ न देकर अफगानिस्तान सरकार का साथ दे। हाल ही में अफगानिस्तान की सांसद मरियम सोलेमानखाइली ने भारत को आगाह करते हुए कहा कि, 'तालिबान, अफगानिस्तान के साथ भारत और पूरी दुनिया के लिए ख़तरा है। ऐसे में भारत को अफगान सैनिक और अफगानिस्तान की सरकार को सपोर्ट करना चाहिए।'

अगले हफ्ते अफगानिस्तान के सेना प्रमुख जनरल वली मोहम्मद अहमदजई भारत पहुंच रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत का फोकस तालिबान ही रहने वाला है। इसका मतलब यह है कि भारत सरकार अभी तक अफगानिस्तान सरकार को ही अफगानिस्तान की जनता का प्रतिनिधि मान रही है। लेकिन जिस तरह से तालिबान, अफगानिस्तान में कब्जा करता जा रहा है, भारत की मुश्किल कम होती नहीं दिख रही है क्योंकि अफगानिस्तान में भारत का बहुत बड़ा स्टेक है जिसे भारत यूं ही नहीं जाने देना चाहेगा।

 

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