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अपने निवेश को खतरा देख चीन ने म्यांमार के सैन्य तख्तापलट को बता दिया 'कैबिनेट फेरबदल'?

लाइव हिन्दुस्तान टीम,बीजिंगPublished By: Priyanka
Wed, 03 Feb 2021 08:07 AM
अपने निवेश को खतरा देख चीन ने म्यांमार के सैन्य तख्तापलट को बता दिया 'कैबिनेट फेरबदल'?

म्यांमार में सेना ने सत्ता अपने कब्जे में लेते हुए आंग सान सू की सहित कई नेताओं को नजरबंद कर दिया। भारत, अमेरिका सहित दुनिया के कई देश जहां इसे सैन्य तख्तापलट करार दे चुके हैं तो वहीं चीन ने इसे महज 'कैबिनेट में फेरबदल' करार दिया है। इतना ही नहीं, चीन ने म्यांमार की सभी राजनीतिक पार्टियों को अपने मतभेद सुलझाने की सलाह तक दे डाली है। हैरानी की बात यह है कि भारत सहित अन्य पड़ोसी मुल्कों के साथ हमेशा आक्रामक रुख रखने वाले चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि मसले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए। हालांकि, सवाल यह है कि आखिर चीन म्यांमार के सैन्य तख्तापलट को लेकर इतना नरम रुख क्यों अपना रहा है?

चीन ने म्यांमार को लेकर क्या कहा?
चीन की शिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक, बीजिंग ने इसे 'बड़ा कैबिनेट फेरबदल' करार देते हुए म्यांमार की सभी पार्टियों को आपसी मतभेद सुलझाने की सलाह दी है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीन के एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यांमार की सत्ता पर सेना के कब्जे को शिथिल पड़ी शक्ति संरचना के समन्वय के तौर पर देखा जाना चाहिए। ठीक ऐसा ही बयान तख्तापलट के बाद म्यांमार के सैन्य शासकों ने भी ऑनलाइन पोस्ट किया था, जिन्होंने सत्ता को कब्जे में लिए जाने को 'जरूरी' बताया। 

संयुक्त राष्ट्र में चीन का नरम रुख
म्यांमार में हुए तख्तापलट की घटना पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक से पहले चीन ने मंगलवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सारी कार्रवाई उस देश में राजनीतिक स्थिरता, शांति एवं सुलह समझौते में योगदान पर केंद्रित होनी चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वेंग वेनबीन ने संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सभी कार्रवाई से म्यांमार में राजनीतिक-सामाजिक स्थिरता और शांति तथा सुलह में योगदान मिलना चाहिए, ताकि तनाव को बढ़ने से रोका जा सके तथा विषय और अधिक जटिल नहीं होने पाए।' सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति रखने वाले चीन का म्यांमार के सैन्य शासन से तब से करीबी संबंध रहा है, जब उसने (म्यांमार की सेना ने) दो दशक तक शासन किया था और बाद में 2016 के चुनावों में सू की के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध रहे हैं।

म्यांमार में भारी निवेश है चीन की नरमी की वजह?
चीन ने म्यांमार में काफी निवेश किया हुआ है और सत्ता परिवर्तन के बाद चीनी निवेशकों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर के मुताबिक, म्यांमार की सैन्य सरकार ने यह घोषणा की है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी गई सू की सरकार के मंत्रियों की जगह वह करीब दर्जन भर नए मंत्री और अधिकारी की नियुक्ति करेगी। इनमें वित्त, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विदेशी आर्थिक रिश्तों, गृह और विदेश मंत्रालय भी शामिल होंगे।

बीजिंग के थिंक टैंक टाहे इंस्टिट्यूट में रिसर्चर यिन यिहैंग ने बताया कि कुछ अधिकारी चीनी निवेश को लेकर बातचीत में शामिल थे, इनके हटने से अब म्यांमार में चीनी प्रॉजेक्ट्स पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन अधिकारियों को बदला जा रहा है उनमें से कई तो आर्थिक सहयोग मंत्रालय में थे। इसका सीधा मतलब यही है कि नए अधिकारियों के आने से कुछ समझौतों पर फिर से बातचीत का दौर शुरू हो जाएगा, जिससे कई चीनी निवेशकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

चीन का एक सबसे बड़ा संयुक्त प्रोजेक्ट म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मंडालय को बंगाल की खाड़ी में स्थित तटीय शहर क्याउप्यू से रेल मार्ग के जरिए जोड़ना है। चीन क्याउप्यू में पानी के अंदर बंदरगाह बनाने और कुछ अन्य उद्योग धंधे शुरू करने की भी योजना बना रहा है। हालांकि, सत्ता परिवर्तन की वजह से अब निकट भविष्य में चीन म्यांमार में कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करता नजर नहीं आ रहा है।

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