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ऑस्ट्रेलिया की संसद में बना इतिहास, पहली बार किसी सांसद ने गीता पर हाथ रखकर ली शपथ

वह पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से हैं। विधानसभा और व‍िधान परिषद ने उन्‍हें संघीय संसद सीनेट में ऑस्‍ट्रेलियाई राज्‍य का प्रतिन‍िध‍ित्‍व करने के लिए चुना है। इसके बाद बुधवार को उन्हें शपथ दिलाई गई।

ऑस्ट्रेलिया की संसद में बना इतिहास, पहली बार किसी सांसद ने गीता पर हाथ रखकर ली शपथ
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,कैनबराWed, 07 Feb 2024 12:03 PM
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ऑस्ट्रेलियाई संसद बुधवार को ऐतिहासिक लम्हे की साक्षी बनी जब एक सांसद ने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली। भारतीय मूल के बैरिस्टर वरुण घोष ने भगवद गीता पर हाथ रखकर शपथ ली। वे ऐसा करने वाले ऑस्ट्रेलियाई संसद के पहले सदस्य बन गए हैं। वे पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से हैं। विधानसभा और व‍िधान परिषद ने उन्‍हें संघीय संसद सीनेट में ऑस्‍ट्रेलियाई राज्‍य का प्रतिन‍िध‍ित्‍व करने के लिए चुना है। इसके बाद बुधवार को उन्हें शपथ दिलाई गई।

ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने एक्स पर लिखा, "पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से हमारे नए सीनेटर वरुण घोष का स्वागत है। सीनेटर घोष भगवद गीता पर शपथ लेने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर हैं। मैंने अक्सर कहा है, जब आप कोई काम सबसे पहले करते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि उसे करने वाले आप आखिरी न हों।'' उन्होंने कहा, ''मैं जानती हूं कि सीनेटर घोष अपने समुदाय और पश्चिम आस्ट्रेलियाई लोगों के लिए एक मजबूत आवाज होंगे। लेबर सीनेट टीम में आपका होना अद्भुत है।'' 

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने भी घोष का स्वागत किया। उन्होंने लिखा, “पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से हमारे नए सीनेटर वरुण घोष का स्वागत है। आपका टीम में होना बहुत ही अच्छी बात है।'' पर्थ के रहने वाले वरुण घोष पेशे से एक वकील हैं। उन्‍होंने यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्‍टर्न ऑस्‍ट्रेलिया से आर्ट्स और लॉ की पढ़ाई की है। वह पहले न्‍यूयॉर्क में फाइनेंस अटार्नी और वॉशिंगटन में विश्‍वबैंक में सलाहकार रह चुके हैं। वरुण घोष ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत पर्थ में लेबर पार्टी से की थी।

घोष की राजनीतिक यात्रा तब शुरू हुई जब वह 1980 के दशक में उनके माता-पिता भारत से ऑस्ट्रेलिया आए थे। वरुण तब 17 साल के थे। 1985 में जन्मे घोष 1997 में पर्थ चले गए और क्राइस्ट चर्च ग्रामर स्कूल में पढ़ाई की। विदेशों में पढ़े के बाद वह 2015 में ऑस्ट्रेलिया लौटे थे और किंग एंड वुड मैलेसन्स के साथ काम करते हुए बैंकों, रिसोर्स कंपनियों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए कानूनी मामले संभाल रहे थे। इसके बाद वह पर्थ में ऑस्ट्रेलिया की लेबर पार्टी में शामिल हो गए। 2019 के संघीय चुनाव में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलियाई लेबर पार्टी के सीनेट टिकट पर पांचवें स्थान पर रहने के बावजूद घोष निर्वाचित नहीं हुए।

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