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बाइडेन और गनी के बीच 23 जुलाई को हुई थी आखिरी बातचीत, 14 मिनट तक क्या चर्चा हुई, क्या काबुल कब्जे की थी भनक?

रॉयटर्स,नई दिल्लीPublished By: Shankar Pandit
Wed, 01 Sep 2021 10:43 AM
बाइडेन और गनी के बीच 23 जुलाई को हुई थी आखिरी बातचीत, 14 मिनट तक क्या चर्चा हुई, क्या काबुल कब्जे की थी भनक?

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से बीच फोन पर बातचीत की थी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया है कि 23 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और अशरफ गनी के बीच बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं के बीच 14 मिनट तक फोन पर सैन्य सहायता, राजनीतिक रणनीति और तालिबान को सबक सिखाने की रणनीति पर चर्चा हुई थी, मगर बाइडेन और अशरफ गनी को अंदेशा नहीं था कि इतनी जल्दी तालिबान काबुल पर कब्जा कर लेगा। बता दें कि तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के साथ ही अफगानिस्तान पर अपना नियंत्रण कर लिया। 

रायटर्स की मानें तो इस बातचीत से ऐसा लगता है कि न तो बाइडन और न ही गनी को तालिबान से होने वाले खतरे की जानकारी थी, क्योंकि इसको लेकर दोनों के बीच कोई ठोस चर्चा नहीं हुई। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तालिबान से मुकाबला करने के लिए अफगानिस्तान को सैन्य सहायता देने की बात कही थी। समाचार एजेंसी ने कहा कि रायटर ने राष्ट्रपति के फोन कॉल की एक ट्रांसस्क्रिप्ट की समीक्षा की और बातचीत को प्रमाणित करने के लिए ऑडियो को सुना। यह सामग्री एक स्रोत से प्राप्त हुई, जिसका नाम जाहिर नहीं किया जा सकता। 

जो बाइडेन ने फोन पर अशरफ गनी से कहा था कि अगर गनी तालिबान के हमले के खिलाफ कोई योजना बनाते हैं तो अमेरिका हर तरह से समर्थन प्रदान करेगा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की मानें तो जब तालिबान अपनी बढ़त काय कर रहा था और एक के बाद एक जिले पर कब्जा कर रहा था तब बाइडेन ने गनी को सलाह दी थी कि वह उस समय अफगान राजनेताओं की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके अफगानिस्तान की धारणा को दुनिया के सामने बदलने की कोशिश करे। इतना ही नहीं,  बाइडन ने गनी को सलाह दी थी कि अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री जनरल बिसमिल्ला खान मुहम्मदी को योजना का वॉरियर बनाया जाए।  

रिपोर्ट के अनुसार, बाइडेन ने अफगान सशस्त्र बलों की सराहना की थी और कहा कि आपके पास स्पष्ट रूप से सबसे अच्छी सेना है। बाइडेन ने 14 मिनट के फोन कॉल में गनी से कहा कि आपके पास अच्छी तरह से 3 लाख सेनाओं की फौज है और वे स्पष्ट रूप से लड़ने में सक्षम हैं। आपके इन सशस्त्र बलों के सामने तालिबान के 70-80 हजार की फौज नहीं टिक पाएगी।

बाइडेन ने यह भी कहा था कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपकी सरकार न केवल जीवित रहे बल्कि कायम रहे और आगे बढ़े, हम कूटनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक रूप से संघर्ष जारी रखेंगे। हालांकि, फोन पर हुई इस बातचीत पर व्हाइट हाउस ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। बता दें कि अफगानिस्तान में अब पूरी तरह से तालिबान का राज है और अमेरिका की सेना तय समय के अनुसार स्वदेश लौट गई। 

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