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भारतीयों को अपनी सेना में कभी नहीं चाहा, PM नरेंद्र मोदी के जाते ही क्या बोली पुतिन सरकार

पीएम नरेंद्र मोदी के मॉस्को से निकलते ही रूस का बयान आया है। रूसी सरकार का कहना है कि उसने कभी भी भारतीयों को अपनी सेना में नहीं चाहा। जल्द समाधान निकालेंगे।

भारतीयों को अपनी सेना में कभी नहीं चाहा, PM नरेंद्र मोदी के जाते ही क्या बोली पुतिन सरकार
Gaurav Kalaपीटीआई,नई दिल्लीWed, 10 Jul 2024 10:38 PM
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पीएम नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय हाई प्रोफाइल मॉस्को यात्रा के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समक्ष भारतीयों के रूसी सेना में अवैध भर्ती और उन्हें प्रताड़ित करने का मुद्दा उठाया था। पीएम मोदी ने पुतिन से अपेक्षा जताई थी कि वे इस मुद्दे को जल्द हल करेंगे और भारतीयों की वापसी जल्दी सुनिश्चित होगी। पीएम मोदी के निकलते ही रूस का बयान आया है। बुधवार को पुतिन सरकार ने कहा कि  रूस ने कभी भी अपनी सेना में भारतीयों को नहीं चाहा, यह भर्ती पूरी तरह से कमर्शियल मामला है। हम इस मामले की जांच कर रहे हैं और रूसी सेना में भर्ती किए गए भारतीयों की वतन वापसी के मुद्दे के शीघ्र समाधान की कोशिश में लगे हैं। 

रूसी सरकार की ओर से इस मुद्दे पर पहली टिप्पणी रूसी राजनयिक रोमन बाबुश्किन की तरफ से आई। उन्होंने कहा कि मॉस्को कभी नहीं चाहता था कि भारतीय उसकी सेना का हिस्सा बनें और यूक्रेन से युद्ध में उनकी उपस्थिति लगभग नगण्य है। बता दें कि कुछ महीने पहले ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी कि टूरिस्ट वीजा पर रूस पहुंच रहे भारतीयों को जबरन और फंसाकर रूसी सेना में भर्ती किया जा रहा है। इस संबंध में वीडियो भी सामने आए थे और भारतीयों ने दावा किया था कि उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद जंग के लिए यूक्रेन भेजा जा रहा है। यूक्रेन में उन्होंने फ्रंटलाइन सैनिकों के रूप में खुद के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। रूस में फंसे भारतीयों का आरोप था कि उन्हें रूस यूक्रेनी सैनिकों का निवाला बनाने के लिए आगे धकेल रहे हैं।

बुधवार को एक सवाल के जवाब में उन्होंने मीडियाकर्मियो से कहा, "हम इस मुद्दे पर भारत सरकार के साथ हैं... हमें उम्मीद है कि मुद्दा जल्द ही सुलझ जाएगा।"

पीएम मोदी ने उठाया था भारतीयों का मुद्दा
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन संकट समेत कई वैश्विक मुद्दों को उठाया था। पीएम मोदी ने पुतिन के सामने भारतीयों की रूसी सेना में अवैध भर्ती और उनके साथ हो रहे बुरे सलूक का मुद्दा भी उठाया था। पीएम मोदी ने अपेक्षा जताई थी कि रूस अपनी सेना में सहायक कर्मचारियों के रूप में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई और घर वापसी सुनिश्चित करेगा। पुतिन ने मोदी के समक्ष वादा किया था और पीएम मोदी के जाते ही पुतिन सरकार की तरफ से यह बयान आया है।

मुद्दे का राजनीतिकरण ठीक नहीं
इस मसले पर बाबुश्किन ने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहिए, हम कभी नहीं चाहते कि भारतीय रूसी सेना का हिस्सा बनें। आपने रूसी अधिकारियों द्वारा इस पर कभी कोई घोषणा नहीं देखी होगी।" रूसी राजनयिक ने कहा कि अधिकांश भारतीयों को इसलिए भर्ती किया गया था क्योंकि वे "पैसा कमाना" चाहते थे।

रूसी सेना में कितने भारतीय
उन्होंने कहा कि रूसी सेना में भारतीयों की संख्या 50, 60 या 100 हो सकती है, जो इतनी बड़ी रूसी सेना में कोई महत्व नहीं रखती है। उन्होंने कहा, "वे पूरी तरह से अपने निजी कारणों और पैसा कमाने के लिए वहां हैं और हम उन्हें भर्ती नहीं करना चाहते थे।" बाबुश्किन ने कहा कि सहायक कर्मचारियों के रूप में भर्ती किए गए अधिकांश भारतीय अवैध रूप से काम कर रहे हैं, क्योंकि उनके पास काम करने के लिए उचित वीजा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनमें से ज्यादातर पर्यटक वीजा पर रूस आए थे।