ताइवान में चीनी सेना के दखल पर अमेरिका ने जताई चिंता, दिया मदद का भरोसा
अमेरिका ने ताइवान पर चीनी सेना के दबाव को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इस प्रकार की डराने-धमकाने की रणनीति क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने शनिवार को...

अमेरिका ने ताइवान पर चीनी सेना के दबाव को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इस प्रकार की डराने-धमकाने की रणनीति क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने शनिवार को कहा, ''ताइवान सहित अपने पड़ोसियों को धमकाने के पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) के प्रयासों को लेकर अमेरिका चिंतित है।"
एक बयान में उन्होंने बीजिंग से अनुरोध किया कि वह ताइवान पर अपने सैन्य, राजनयिक और आर्थिक दबाव को समाप्त करके लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए ताइवान के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत करे। उन्होंने कहा, ''हिंद प्रशांत क्षेत्र में साझा समृद्धि,सुरक्षा और मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए हम मित्रों और सहयोगियों के साथ खड़े हैं।"
प्राइस ने कहा कि अमेरिका जलडमरूमध्य पार के मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान को समर्थन देना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका 'थ्री कम्यूनीक्स,' ताइवान रिलेशन्स एक्ट और 'सिक्स एश्योरेंसेज' में रेखांकित प्रतिबद्धताओं पर कायम है। प्राइस ने कहा, ''हम पर्याप्त आत्म-रक्षा क्षमताओं को बरकरार रखने में ताइवान की मदद करेंगे। ताइवान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता दृढ़ है और ताइवान जलडमरूमध्य के आर-पार और क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बनाए रखने में योगदान देने वाली है।"
चीन पर साधा निशाना
बीते 20 जनवरी को नवनियुक्त रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने क्षेत्र और दुनिया भर में चीन के 'डराने-धमकाने वाले व्यवहार का उल्लेख करते हुए अमेरिकी सांसदों से कहा था कि चीन पहले ही 'क्षेत्रीय प्रभुत्वकारी' शक्ति बन चुका है और अब उसका लक्ष्य 'नियंत्रणकारी विश्वशक्ति' बनने का है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, कोरोना वायरस के उद्गम, विवादित दक्षिण चीन सागर में कम्युनिस्ट देश की सैन्य आक्रामकता और मानवाधिकार सहित कई मुद्दों पर कटु टकराव चल रहा है।
चीन को नाकाम करने के लिए एकजुट होकर काम करने की जरूरत
ऑस्टिन ने सीनेट की सैन्य सेवा मामलों की समिति को रक्षामंत्री के तौर पर अपनी नियुक्ति की पुष्टि के लिए हुई सुनवाई के दौरान कहा था, ''वे (चीन) पहले ही क्षेत्रीय प्रभुत्वकारी ताकत है और मेरा मानना है कि उनका अब लक्ष्य नियंत्रणकारी विश्व शक्ति बनने का है। वह हमसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए काम कर रहे हैं और उनके प्रयास नाकाम करने के लिए पूरी सरकार को एक साथ मिल कर विश्वसनीय तरीके से काम करने की जरूरत होगी।"
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