अमेरिका ने ईरान में पहली बार उतरा बी-1 बॉम्बर
- ऑनलाइन प्लेन ट्रैकिंग वेबसाइट ने जानकारी दी - बॉम्बर ने ब्रिटेन के एयरबेस

वॉशिंगटन, एजेंसी।
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को पहली बार ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के ठिकानों पर हमले करने के लिए बी-1 लांसर लॉन्ग-रेंज बॉम्बर का इस्तेमाल किया।
संघर्ष की पुनरारंभ
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक 12 दिन पहले दोबारा संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब बी-1 लांसर बॉम्बर को मिशन पर भेजा गया है। ऑनलाइन प्लेन ट्रैकिंग वेबसाइट के मुताबिक इस बॉम्बर ने ब्रिटेन के एयरबेस से उड़ान भरी थी। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अपने आधिकारिक बयान में बी-1 मिशन का जिक्र नहीं किया। उसने केवल इतना कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताओं, एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट और सैन्य लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया, ताकि होर्मुज में पोतों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता कमजोर की जा सके। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब भी ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में लड़ाई और तेज हो सकती है। वहीं ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने होर्मुज में पोतों पर हमले जारी रखे तो अमेरिका तेहरान समेत ईरान के पुलों और पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता है। बी-1 अमेरिकी वायुसेना का सबसे ताकतवार बमवर्षक है। यह सबसे भारी बम ले जाने वाला विमान है। कम ऊंचाई पर आवाज की रफ्तार से भी तेज उड़ सकता है। ये दो दर्जन 2,000 पाउंड के बम या दर्जनों क्रूज मिसाइलें ले जाने में सक्षम है। ऐसे में इसका इस्तेमाल अमेरिकी अभियान के बड़े विस्तार का संकेत माना जा रहा है। 146 फीट लंबा ये विमान विंगस्पैन के साथ 137 फीट हो जाता है और इसका वजन करीब 86,200 किलोग्राम तक होता है।


