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24 सितम्बर, 2020|7:55|IST

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रूस, चीन और ईरानी हैकरों के निशाने पर अमेरिकी चुनाव

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अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने दावा किया है कि रूस, चीन और ईरान के हैकरों के निशाने पर चुनाव है। उसने कहा कि वे चुनाव से जुड़े लोगों और समूहों की जासूसी करने का प्रयास कर रहे हैं। कंपनी के मुताबिक 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के चुनाव प्रचार को प्रभावित करने में जो रूसी हैकर शामिल थे, वही इस बार भी सक्रिय हो गए हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि विदेशी समूहों ने चुनाव को निशाना बनाने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन दोनों के चुनाव प्रचार हैकरों की नजर में है।

 200 संगठनों को निशाना बनाया
कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि स्ट्रॉन्टियम समूह से संबंधित रूसी हैकरों ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े 200 से ज्यादा संगठनों को निशाना बनाया है। स्ट्रॉन्टियम समूह को फैंन्सी बियर के नाम से भी जाना जाता है। यह साइबर हमला करने वाली एक यूनिट है जो कि कथित तौर पर रूसी सेना की खुफिया एजेंसी जीआरयू से जुड़ी हुई है। माइक्रोसॉफ्ट के उपाध्यक्ष टॉम बर्ट ने कहा कि जैसा कि हमलोगों ने 2016 में देखा था, ठीक उससे मिलता-जुलता स्ट्रॉन्टियम ने लोगों के लॉग-इन रिकॉर्ड तक पहुँचने के लिए या उनके अकाउंट को हैक करने के लिए एक अभियान की शुरुआत की है।

साइबर हमले नाकाम 
कंपनी के अनुसार चीनी हैकरों ने जो बाइडेन के चुनावी प्रचार से जुड़े लोगों को व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जबकि ईरानी हैकर  ट्रंप चुनाव प्रचार से जुड़े लोगों को निशाना बना रहे हैं। हालांकि कंपनी ने दावा किया है कि ज्यादातर साइबर हमले अभी तक कामयाब नहीं हुए हैं। हैकरों ने मतदान कराने वाले अधिकारियों को अभी तक निशाना नहीं बनाया है।

सक्रिय हुए समूह
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि चीनी हैकरों ने बाइडन के प्रचार से जुड़े लोगों के निजी ई-मेल अकाउंट और ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक पूर्व प्रमुख अधिकारी के अकाउंट को निशाना बनाया है। जिरकोनियम के नाम से मशहूर चीनी हैकरों के समूह ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े प्रमुख लोगों, शिक्षण संस्थानों और नीति बनाने वाली संस्थाओं से जुड़े लोगों को भी निशाना बनाया है। कंपनी अभी तक ये तय नहीं कर पा रही है कि आखिर रूसी, चीनी और ईरानी हैकरों का मकसद क्या है।

प्रक्रिया पर प्रभाव नहीं पड़ेगा 
होमलैंड सुरक्षा विभाग के शीर्ष साइबर अधिकारी क्रिस्टोफर क्रेब्स ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट की चेतावनी ने इस बात की पुष्टि की है, जो कि अमरीकी खुफिया विभाग के लोग पहले ही कह चुके हैं। उनका कहना था कि इस बात को उजागर करना बहुत महत्वपूर्ण है कि जो लोग भी निशाने पर हैं उनमें से कोई भी चुनाव कराने की प्रक्रिया में शामिल नहीं है और इससे मतदान की प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

चुनाव प्रभावित करने के आरोप में चार रूसी एजेंट प्रतिबंधित
अमेरिकी सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास के आरोप में रूस के चार लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें यूक्रेन के एक सांसद एंड्री डेरकैच भी हैं। बाकी तीन रूसी नागरिक हैं। अमेरिका में इन चारों की संपत्ति जब्त कर ली गई है। अमेरिकी नागरिक इनसे किसी तरह का लेन-देन नहीं कर पाएंगे। अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक ये चारों रूस स्थित इंटरनेट रिसर्च एजेंसी (आईआरए) से जुड़े हुए हैं। आईआरए को पहले ही 2016 के अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप के लिए प्रतिबंधित किया जा चुका है। ये वही डेरकैच हैं,  जो पिछले दिसंबर में यूक्रेन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील रूडी गुइलानी से मिले थे। 

 

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  • Web Title:US elections target Russia China and Iranian hackers