अमेरिका-कनाडा शुल्क तनाव से भारत को फायदा
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार युद्ध में 50 प्रतिशत शुल्क तीन दिनों के लिए टाल दिया गया है। व्यापार में अनिश्चितता के बीच, भारत को नए निर्यात अवसर मिल सकते हैं। अमेरिका के आयातक यदि टैरिफ बढ़ता है, तो भारत को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के रूप में देख सकते हैं।

नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिका-कनाडा के बीच चल रहे व्यापार युद्ध पर भले ही कुछ दिनों की रोक लग ही है, लेकिन अभी भी कनाडा पर 50 प्रतिशत शुल्क की तलवार लटक रही है। गुरुवार सुबह से लागू होने वाले 50 प्रतिशत शुल्क को अमेरिकी राष्ट्रपति ने तीन दिनों के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि कनाडा पर गुरुवार सुबह से लागू होने वाले 50% शुल्क को तीन दिनों के लिए रोक दिया है। उन्होंने कहा कि ये फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि अमेरिका और कनाडा के बीच एक डील बन गई है और अब सिर्फ दस्तावेजों को अंतिम रूप देना बाकी है। हालांकि, अगर ये तीन दिन में अमेरिका और कनाडा किसी एक फैसले पर नहीं पहुंचे और टैरिफ लागू होता, तो करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लग सकता था。
ट्रंप के आयात शुल्क
ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले ये आयात शुल्क कनाडा से हर साल अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान के करीब पांच प्रतिशत हिस्से पर लागू होते। इनमें हॉकी स्टिक से लेकर जीभ की जांच में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की छोटी छड़ियों (टंग डिप्रेसर) तक कई तरह के उत्पाद शामिल हैं। कनाडा ने चेतावनी दी थी कि नए शुल्क लगाए जाने की स्थिति में वह भी अपने स्तर पर शुल्क लगाकर जवाब देगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक विवाद और बढ़ सकता था। पिछले साल दोनों देशों के बीच 880 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार हुआ था।
भारत के लिए मौका
भारत के लिए खुल सकता है मौका अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे इस टैरिफ के तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन में एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे में भारत के लिए ये स्थिति नए निर्यात अवसर पैदा कर सकती है। अगर अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर तनाव आगे बढ़ता है और दोनों देशों के बीच कुछ उत्पादों पर शुल्क बढ़ता है, तो अमेरिकी आयातक वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता की तलाश कर सकते हैं। यहां भारत एक संभावित आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकता है।
लाभकारी क्षेत्र
खासकर इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों में भारतीय कंपनियों को फायदा मिल सकता है। अमेरिका पहले से ही भारत के प्रमुख निर्यात बाजार में शामिल है, इसलिए आपूर्ति शृंखला में बदलाव होने पर भारतीय कंपनियों के लिए नए ऑर्डर हासिल करने की गुंजाइश बन सकती है।


