ट्रेंडिंग न्यूज़

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ विदेशरूस के खिलाफ अमेरिका-जर्मनी ने खत्म किए सारे गतिरोध, यूक्रेन को युद्धक टैंक देने पर दोनों एकजुट

रूस के खिलाफ अमेरिका-जर्मनी ने खत्म किए सारे गतिरोध, यूक्रेन को युद्धक टैंक देने पर दोनों एकजुट

उम्मीद है कि इन टैंकों के जरिए अब यूक्रेन रूसी सेना पर दूर तक हमले कर सकेगा और रूस के आक्रमण को कुंद कर सकेगा। यूक्रेन को इस बात का डर है कि रूस ठंड के बाद यूक्रेन पर हमले की नई योजना बना रहा है।

रूस के खिलाफ अमेरिका-जर्मनी ने खत्म किए सारे गतिरोध, यूक्रेन को युद्धक टैंक देने पर दोनों एकजुट
Pramod Kumarब्लूमबर्ग,नई दिल्लीWed, 25 Jan 2023 08:27 AM

इस खबर को सुनें

0:00
/
ऐप पर पढ़ें

Ukraine-Russia War: यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच अमेरिका और जर्मनी अब यह घोषणा करने के लिए तैयार हैं कि मॉस्को से मुकाबला करने के लिए वे कीव को अपने मुख्य युद्धक टैंक प्रदान करेंगे। शक्तिशाली हथियारों को देने पर अब दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। संभावना है कि बुधवार को ही दोनों देश लेपर्ड-2 टैंक और एम 1 अब्राम्स टैंक यूक्रेन भेजने का ऐलान कर सकते हैं।

इस मामले से परिचित दो लोगों ने कहा कि बाइडेन प्रशासन द्वारा बुधवार को ही घोषणा करने की उम्मीद है कि वह यूक्रेन को एम 1 अब्राम्स टैंक की पेशकश करेगा, इस तर्क को छोड़ते हुए कि यह वाहन बहुत अधिक गैस छोड़ता है और इसे संचालित करना मुश्किल है। जर्मनी, जिसने जोर देकर कहा था कि वह इस तरह के टैंकों की पेशकश करने वाला अकेला देश नहीं होना चाहता, भी यूक्रेन को लेपर्ड-2 सीरीज का 14 A6 टैंक भेजेगा। जर्मनी के इस फैसले से परिचित एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर ब्लूमबर्ग को बताया है।

अमेरिका और रूस के इस कदम से यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की की सेना पहले से और ताकतवर हो सकेगी और उसे हमला करने में नई क्षमता देगी क्योंकि यूक्रेन में अब लड़ाई शहरी केंद्रों से पूर्व की ओर स्थानांतरित हो गई है जहां 24 फरवरी को रूसी आक्रमण के बाद से ही रूसी सेना जमी हुई है।

क्या है Leopard-2 टैंक, जिसे यूक्रेन को देने पर चल रहा रार, जानें- खूबियां

उम्मीद यह है कि इन टैंकों के जरिए अब यूक्रेन रूसी सेना पर दूर तक हमले कर सकेगा और रूस के आक्रमण को कुंद कर सकेगा। यूक्रेन के सैन्य अधिकारियों को इस बात का डर है कि रूस ठंड के बाद यूक्रेन पर हमले की नई योजना बना रहा है। उन्हें इस बात की भी उम्मीद है कि इन टैंकों के मिल जाने से वह रूसी मंसूबों को नाकाम कर सकते हैं।

अमेरिका और जर्मनी के इस फैसले से NATO देशों के बीच आ रही दरार को पाटने में मदद मिलेगी जो टैंक भेजने के मुद्दे पर दो फाड़ होते दिख रहे थे। अब अन्य यूरोपीय देश भी यूक्रेन को टैंक भेजने के मुद्दे पर आगे बढ़ सकेंगे। NATO पहले से ही इस रणनीति पर काम करता रहा है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन को युद्ध के मोर्चे पर पूरी दुनिया से अलग-थलग कर दिया जाय।