चलते-चलते::चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कब्जे की होड़ ने बढ़ाई चिंता
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कब्जे और शोध को लेकर चीन और अमेरिका के बीच नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। दोनों देश पानी की बर्फ की खोज में लगे हैं, जिसका उपयोग भविष्य में रॉकेट ईंधन और जीवनदायिनी सामग्री के रूप में किया जा सकता है। चीन 2040 तक स्थायी मानव बस्ती बनाने की योजना बना रहा है।

चीन को टक्कर देने उतरेगा अमेरिका 2040 तक स्थायी बेस बनाने की तैयारी में चीन
बीजिंग, एजेंसी। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कब्जे और शोध को लेकर चीन और अमेरिका के बीच नई रेस शुरू हो गई है। दोनों देशों की नजरें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद बर्फ के पानी पर टिकी हैं। इस पानी का उपयोग भविष्य में रॉकेट ईंधन, पीने के पानी और ऑक्सीजन बनाने में किया जा सकता है, जो अंतरिक्ष में इंसान के लंबे समय तक रहने के लिए बेहद जरूरी है। दोनों देशों के बीच शुरू हुई इस होड़ ने चिंता बढ़ा दी है।
चीन लॉन्च कर रहा रोबोटिक मिशन
चीन इसी महीने चांग'ई-7 अपना रोबोटिक मिशन लॉन्च करने जा रहा है। इसमें एक ऑर्बिटर, लैंडर, रोवर और एक 'होपर' शामिल हैं, जो सीधे पानी की बर्फ की खोज और ड्रिलिंग करेंगे। चीन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारना है। 2040 तक चंद्रमा पर स्थायी मानव बस्ती बनाने की योजना बना रहा है।
अमेरिका इसी साल भेजेगा यान
अमेरिका निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। नासा 2026 के अंत तक 'ग्रिफिन' नामक लैंडर को दक्षिणी ध्रुव पर भेजने की तैयारी में है। अमेरिका की मंशा चंद्रमा पर लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नियमों के तहत अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की है।
क्यों बढ़ी चिंताएं?
चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम बेहद गोपनीय है, जिसके कारण उसकी सटीक प्रगति का अंदाजा लगाना कठिन है। 1972 के अपोलो मिशन के बाद से अब तक कोई इंसान चंद्रमा पर नहीं गया है, लेकिन अब दोनों देश वहां सिर्फ दौरा करने के बजाय अपनी स्थायी बस्तियां बसाने की होड़ में लगे हैं।


