दुनिया के आधे बच्चे हीटवेव, तूफान, बाढ़ जैसे जलवायु खतरों की जद में: रिपोर्ट

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के आधे बच्चे अब जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं। इसमें हीटवेव, तूफान और सूखा शामिल हैं। एक अरब से अधिक बच्चे कम से कम तीन जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं, जिसमें भारत और अन्य एशियाई देशों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं।

दुनिया के आधे बच्चे हीटवेव, तूफान, बाढ़ जैसे जलवायु खतरों की जद में: रिपोर्ट

इससे उनकी सेहत, शिक्षा और जीवन को बड़े खतरे लगभग हर बच्चा अब कम से कम एक खतरे का सामना कर रहा

जलवायु संकट का प्रभाव

यूनिसेफ की चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट, हीटवेव, तूफान, बाढ़ और सूखे के खतरों का सामना कर रहे बच्चे

विकसित देशों के बच्चे भी अब इससे अछूते नहीं

न्यूयॉर्क, एजेंसी। दुनिया के आधे बच्चे इस वक्त कम से कम तीन ऐसे जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं जो उनकी सेहत, शिक्षा और जीवन के लिए खतरा हैं। यूनिसेफ की ओर से मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु संकट के बिगड़ने के साथ ही बच्चे हीटवेव, तूफान, बाढ़ और सूखे जैसे बढ़ते खतरों का सामना कर रहे हैं। एक अरब से अधिक बच्चे इनमें से कम से कम तीन खतरों का एक साथ सामना कर रहे हैं।

बढ़ता तापमान, खराब मौसम

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कई तस्वीरें भी जारी की हैं। एक चौंकाने वाले फुटेज में पापुआ न्यू गिनी के बच्चों को स्कूल जाने के लिए मगरमच्छों से भरी नदी को तैरकर पार करते हुए दिखाया गया है। भारी बारिश के दौरान पैदल पुल बह जाने की वजह से बच्चे ऐसा करने को मजबूर हुए।

बढ़ता तापमान, खराब मौसम सबसे बड़ी परेशानी

यूनिसेफ की 'चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट' के अनुसार बढ़ता तापमान और खराब मौसम इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक दबाव डाल रहे हैं। रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि मुख्य सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंच रहा है, जिसका स्थानीय समुदाय पर गंभीर असर पड़ रहा है।

दुनिया भर में लगभग हर बच्चा कम से कम एक खतरे का सामना कर रहे हैं, जबकि 12.3 करोड़ बच्चे ऐसे इलाकों में रह रहे जो जिंदगी में छह से अधिक खतरों का सामना करते हैं। बड़ी बात यह है कि विकसित देशों के बच्चे भी इसी तरह के संकट का सामना कर रहे हैं।

आठ तरह के खतरों का विश्लेषण

यूनिसेफ ने युवाओं पर जलवायु से जुड़े आठ खतरों के असर का विश्लेषण किया है। इसमें तटीय बाढ़, सूखा, अत्यधिक गर्मी, आग, हीटवेव, नदी में बाढ़, रेत और धूल भरी आंधी, और उष्णकटिबंधीय तूफान शामिल हैं।

अफ्रीका का साहेल इलाका दुनिया भर में सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में से एक है, जहां 40 लाख से ज्यादा बच्चे हीटवेव, अत्यधिक गर्मी और रेत व धूल भरी आंधी के तिहरे खतरे का सामना कर रहे हैं।

भारत भी प्रभावित

भारत, बांग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान जैसे एशियाई देशों के बच्चे दुनिया में कहीं और की तुलना में अधिक जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं। अधिक आय वाले देश भी जलवायु से जुड़े एक साथ कई झटकों से अछूते नहीं हैं। उदाहरण के लिए, इटली में 60 लाख से ज्यादा बच्चे लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव और सूखे का सामना कर रहे हैं।

कोट:

हीटवेव, जंगल की आग, सूखे और बाढ़ के असर से बच्चों की जिंदगी में उथल-पुथल हो रही है। दुनिया के आधे बच्चे अब कम से कम तीन ऐसे जलवायु खतरों के साथ जी रहे हैं जो एक-दूसरे से जुड़े हैं और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रहे हैं

कैथरीन रसेल,एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, यूनिसेफ

जलवायु से जुड़े खतरों के संपर्क में आने वाले बच्चों की संख्या

खतरे बच्चों की संख्या(पूरी दुनिया में)

सूखा 1.8 अरब

हीटवेव 1.5 अरब

अत्यधिक गर्मी 1.2 अरब

वायु प्रदूषण 2.3 अरब

जंगल की आग 20.6 करोड़

धूल भरी आंधी 12.3 करोड़

तूफान 66.2 करोड़

बाढ़ 33.7 करोड़

तटीय बाढ़ 33 लाख

दुनियाभर में स्कूलों में सुरक्षित नहीं बच्चे, हमले 40 फीसदी बढ़े

ग्लोबल कोएलिशन टू प्रोटेक्ट एजुकेशन फ्रॉम अटैक की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 और 2025 में दुनिया भर में शिक्षा पर हमलों में 40% की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान 8556 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं और 10600 छात्र और स्टाफ मारे गए या घायल हुए।

83 देशों में हमले हुए, जिनमें सबसे अधिक घटनाएं कोलंबिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो, इथियोपिया, हैती, फलस्तीन और यूक्रेन में दर्ज की गईं।

यूक्रेन में स्कूलों पर लगभग 900 हमले हुए, जबकि फ़िलिस्तीन में छात्रों और स्टाफ पर कम से कम 2400 हमले हुए।

सामान्य प्रश्न

जलवायु संबंधी खतरों से कितने बच्चे प्रभावित हैं?
दुनिया भर में लगभग हर बच्चा कम से कम एक खतरे का सामना कर रहा है।
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