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तटस्थता से युद्ध रोकने में मदद नहीं मिलेगी... भारत की स्थिति पर बोला यूक्रेन

रूस-यूक्रेन के बीच महायुद्ध दो महीने से जारी है। यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने भारत के रुख पर कहा कि तटस्थता ऐसी स्थिति है जो युद्ध को रोकने में कभी भी मदद नहीं कर सकती।

तटस्थता से युद्ध रोकने में मदद नहीं मिलेगी... भारत की स्थिति पर बोला यूक्रेन
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 27 Apr 2022 09:40 PM

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रूस-यूक्रेन के बीच महायुद्ध परमाणु हमले की धमकियों के बीच दो महीने से ज्यादा वक्त के बाद भी जारी है। इस बीच बुधवार को यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने भारत के रुख पर कहा कि तटस्थता ऐसी स्थिति है जो युद्ध को रोकने में कभी भी मदद नहीं कर सकती। बताते चलें कि भारत लगातार यूक्रेन और रूस के बीच जंग रोकने की अपील करता रहा है। जबकि, यूक्रेन का आरोप है कि भारत इस युद्ध में न तो खुले तौर यूक्रेन का पक्ष नहीं ले रहा है।

रूस और यूक्रेन के बीच जब से जंग शुरू हुई है, तब से दुनिया दो खेमों में बंट गई है। एक तरफ कुछ देशों ने रूस का साथ दिया है तो दूसरी ओर पश्चिमी देशों, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों ने यूक्रेन की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। जबकि भारत इस मामले में तीसरे कदम पर है।  भारत ने कहा है कि वह शांति के पक्ष में है और रूस और यूक्रेन दोनों से युद्ध समाप्त करने की अपील की। हालांकि, भारत ने युद्ध में दोनों देशों में से किसी के खिलाफ एक स्पष्ट स्थिति लेने से लगातार परहेज किया है।

इंडिया टुडे के साथ बातचीत में यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने बुधवार को कहा कि तटस्थता एक ऐसी स्थिति है जो युद्ध को रोकने में मदद नहीं करती है।

उन्होंने कहा, ''हम यूक्रेन के लिए भारत के नेतृत्व की ओर से आ रही सहानुभूति की सराहना करते हैं। हम भारत की स्थिति की भी सराहना करते हैं कि युद्ध को रोकना चाहिए। लेकिन इन परिस्थितियों में तटस्थता वह स्थिति है जो युद्ध को रोकने में मदद नहीं करती है। युद्ध को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि यूक्रेन का समर्थन किया जाए और रूस को इस भ्रम के साथ छोड़ दिया जाए कि वह युद्ध जीत सकता है।"

गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा था कि यूक्रेन में संघर्ष से निपटने के दो सर्वश्रेष्ठ तरीके हैं। लड़ाई रोकना और वार्ता करने पर जोर देना।

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