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रिसर्च में खुलासाः वामपंथी के बजाय दक्षिणपंथी पार्टियों के ट्वीट्स को मिलती है प्राथमिकता

हिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीGaurav Kala
Sun, 24 Oct 2021 09:27 PM
 रिसर्च में खुलासाः वामपंथी के बजाय दक्षिणपंथी पार्टियों के ट्वीट्स को मिलती है प्राथमिकता

रिसर्च में ये बात सामने आई है कि ट्विटर का एल्गोरिथम वामपंथी विचारधारा के बजाय दक्षिणपंथी पार्टियों के ट्वीट्स को ज्यादा प्राथमिकता देता है। रिसर्च करने वाली कंपनी का कहना है कि उसने ट्विटर के एल्गोरिथम के काम करने के तरीके पर अध्ययन किया। ये रिसर्च सात देशों पर की गई। इसमें ये बात सामने आई है कि ट्विटर अपने यूजर्स को दक्षिणपंथी राजनीतिक विचारधारा वाली पार्टियों के ट्वीट की सिफारिश करता है। 

ट्विटर के एल्गोरिथम को लेकर हुए इस रिसर्च में कंपनी ने सोशल मीडिया कंपनियों के 5% सक्रिय उपयोगकर्ताओं को शामिल किया गया। ये रिसर्च इस तरह के सबसे बड़ी रिसर्च में से एक है। इसमें ये पता किया गया कि पार्टियों के ट्वीट सोशल मीडिया पर लोगों को कितना प्रभावित करते हैं। इसके अलावा इसका क्या सामाजिक प्रभाव पड़ता है?

रिसर्च कंपनी ने दुनिया के सात देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, स्पेन, ब्रिटेन और अमेरिका पर यह अध्ययन किया। इन देशों की राजनीतिक पार्टियों द्वारा ट्विटर पर साझा की गई सामग्रियों की एक अप्रैल 2020 से 15 अगस्त तक जांच की गई। रिसर्च में सामने आया है कि दक्षिणपंथी पार्टियों के ट्वीट को लेफ्ट विचारधारा की पार्टियों की तुलना में अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।

रिसर्च में कहा गया है, "हमारे परिणाम उल्लेखनीय रूप से सुसंगत प्रवृत्ति को प्रकट करते हैं। अध्ययन किए गए 7 में से 6 देशों में दक्षिणपंथी विचारधारा के राजनीतिक ट्वीट वामपंथ की तुलना में उच्च एल्गोरिथम प्राप्त करते हैं। इससे पता चलता है कि एल्गोरिथम का प्रवर्धन दक्षिणपंथी विचारधारा का पक्षधर है। " इस रिसर्च में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, यूसी बर्कले और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शिक्षाविद शामिल थे।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में मशीन लर्निंग के वरिष्ठ व्याख्याता फेरेंक हुजर ने हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि इसके कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने एक ईमेल में कहा, "हम जो पैटर्न देखते हैं, वे कई योगदान कारकों का परिणाम हो सकते हैं, और शायद बहुत अधिक स्पष्ट हैं।"

ट्विटर मेटा टीम की निदेशक रुम्मन चौधरी ने बताया कि हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका कारण क्या है? ये बात निकलकर आ रही है कि वामपंथी दलों की तुलना में दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पाटियों के ट्वीट्स एग्लोरिथम तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी इन सवालों का जवाब देना काफी कठिन है। 

ऐसा पहली बार नहीं है जब ट्विटर के एल्गोरिथम पर सवाल खड़े हुए हैं। इससे पहले अप्रैल में भी हुई एक स्टडी में सामने आया था कि काले लोगों की तुलना में ट्विटर गोरे व युवा चहरों को ज्यादा तरजीह देता है। 
 

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