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F-16 पर अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट को ट्रंप सरकार ने भी किया खारिज

अमेरिकी सरकार ने भी एफ-16 लड़ाकू विमान पर आई अमेरिकी मीडिया को खारिज कर दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग 'पेंटागन' ने शनिवार को एफ-16 विवाद से खुद को अलग कर लिया। पेंटागन के प्रवक्ता ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि एफ-16 लड़ाकू विमान की जांच के संबंध में फॉरेन पालिसी पत्रिका ने अनाम रक्षा अधिकारी के हवाले से जिस जांच दल पाकिस्तान भेजे जाने की बात कही है, उनके विभाग के पास ऐसी कोई जानकारी है। 

पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि यह पॉलिसी का मामला है इसलिए दो सरकारों के बीच के किसी समझौते या अमेरिका में तैयार हुए किसी हथियार की मेंटिनेंस के संबंध में वह कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं दे सकते। साथ ही प्रवक्ता ने पाकिस्तान पर अपनी घोषित नीति को दोहराया गया। उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि जनवरी, 2018 से अमेरिकी ने पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता निलंबित कर दी है।

असल में शुक्रवार को अमरीका की प्रतिष्ठित पत्रिका 'फॉरेन पॉलिसी' में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान में अमेरिकी दल ने जाकर एफ-16 विमानों का निरीक्षण किया और वे सभी सुरक्षित पाए गए। रिपोर्ट के इस दावे को भारतीय वायुसेना खारिज कर चुकी है और कहा है कि 27 फरवरी को हुई डॉगफाइट के दौरान उसने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को गिराया था। 

रक्षा मंत्री ने अमेरिकी पत्रिका की रिपोर्ट खारिज की 

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन पॉलिसी' में हाल में प्रकाशित एफ-16 संबंधी रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।  इस रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान को मिले सभी अमेरिका निर्मित एफ -16 युद्धक विमान सुरक्षित हैं और उन्हें नियमानुरूप प्रयोग किया गया था।

रक्षामंत्री ने शनिवार को प्रेसवार्ता में दोहराया है कि बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने एफ-16 विमानों का इस्तेमाल करके भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की थी। साथ ही उन्होंने सलाह दी है कि रिपोर्ट लिखने वाली पत्रकार और पत्रिका से जुड़े अन्य लोग इस संबंध में भारतीय वायु सेना की ओर से पेश किए गए 'तथ्यात्मक और तकनीकी' साक्ष्यों का अध्ययन कर सकते हैं। 

'इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर' को विमान मार गिराने का सबूत मान रही है अमेरिकी सरकार  

अमेरिकी सरकार का रुख भारत के अनुरुप है, क्योंकि वह लड़ाकू विमान को मार गिराने के सबूत के रूप में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर को महत्व दे रहा है। रक्षामंत्री निर्माला सीतारमण ने भी प्रेसवार्ता में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का हवाला दिया है। उन्होंने कहा , ' भारतीय वायु सेना ने जिस पाकिस्तानी विमान के इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर को अपने रडार पर दर्ज किया था, वह निश्चित रूप से एफ-16 था। यह बात बिल्कुल स्पष्ट है। विमान की उड़ान के दौरान होने वाले कंपन और संबंधित तरंगों आदि से बना यह इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर मानव हस्ताक्षर की तरह ही प्रत्येक विमान के लिए अलग-अलग होता है।' उन्होंने सवाल किया कि 27 फरवरी के बाद वायु सेना ने अमराम मिसाइल के टुकड़े भारतीय क्षेत्र में होने के सबूत पेश किये थे। ये मिसाइल केवल एफ 16 विमान से ही दागी जाती है। अगर पाकिस्तान ने इस विमान का इस्तेमाल नहीं किया तो ये मिसाइल के ये टुकड़े हमारी जमीन पर कहां से और कैसे आए?

अमेरिकी पत्रिका का दावा 

पत्रिका 'फॉरेन पॉलिसी' के मुताबिक, 'दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने हाल ही में एफ-16 विमानों का निरीक्षण किया है और वे सभी सुरक्षित पाए गए।' इस पड़ताल के नतीजे भारतीय वायु सेना के उस दावे से उलट है, जिन्होंने कहा था कि विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने विमान गिरने से पहले एक पाकिस्तानी एफ-16 विमान मार गिराया था। पाकिस्तानी मिसाइल से खुद अभिनंदन का लड़ाकू विमान नष्ट हो गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने फॉरेन पॉलिसी को बताया कि दोनों देशों के बीच हालिया विवाद के कारण कुछ विमानों को तुरंत जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया था, इसलिए गिनती करने में कुछ सप्ताह लग गए। 

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया 

पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि 'अब समय आ गया है कि भारत अपने नुकसान के बारे में सच्चाई बताए।

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