ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News विदेशमालदीव में भारतीय सैन्य तैनाती का सच क्या, सच्चे दोस्त को नहीं पहचान पा रहे हैं मुइजू?

मालदीव में भारतीय सैन्य तैनाती का सच क्या, सच्चे दोस्त को नहीं पहचान पा रहे हैं मुइजू?

मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद से ही मोहम्मद मुइजू भारत को लेकर एक रट लगाए बैठे हैं। वह बार-बार कह रहे हैं कि भारत उनके देश से अपनी सेना हटा ले। यहां तक कि शनिवार को भी उन्होंने यह बात फिर दोहराई।

मालदीव में भारतीय सैन्य तैनाती का सच क्या, सच्चे दोस्त को नहीं पहचान पा रहे हैं मुइजू?
Deepakशिशिर गुप्ता, हिन्दुस्तान टाइम्स,मालेSun, 19 Nov 2023 03:42 PM
ऐप पर पढ़ें

मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद से ही मोहम्मद मुइजू भारत को लेकर एक रट लगाए बैठे हैं। वह बार-बार कह रहे हैं कि भारत उनके देश से अपनी सेना हटा ले। यहां तक कि शनिवार को भी उन्होंने यह बात एक बार फिर से दोहराई। मुइजू की बार-बार इस मांग के बीच आइए जानते हैं आखिर मालदीव में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी कितनी है? क्या वास्तव में भारतीय सेना मालदीव में किसी निर्णायक भूमिका में है? या भारतीय सैनिकों का किसी चीज पर नियंत्रण है? वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि समुद्र के बढ़ते पानी के चलते अस्तित्व बचाने को जूझ रहे मालदीव के राष्ट्रपति असली दोस्त को पहचानने में कोई भूल तो नहीं कर रहे?

सेना की तैनाती नहीं
सबसे पहली बात तो यह है कि मुइजू के दावे के उलट, भारत मालदीव में सैनिकों को तैनात नहीं करता है। फैक्ट यह है कि यहां पर भारत के पास अपने गश्ती पोत, डोर्नियर विमान और दो एएलएच हेलीकॉप्टरों के क्रू मेंबर्स और टेक्नीशियन ही हैं। यह सभी मेडिकल इवैक्युएशन, निगरानी और हवाई बचाव कार्यों जैसे खास काम के लिए मालदीव में मौजूद हैं। यह सभी वहां पर किसी सैनिक तैनाती पर नहीं है, बल्कि मानववादी मिशन पर हैं। ऐसे में इन्हें भारतीय सैन्य बल कहना न सिर्फ लोगों को भटकाना है, बल्कि झूठा भी है।

कुल इतने मिशन
साल 2019 से अभी तक यहां पर कुल 977 मिशन तैनात रहे हैं। यहां रहते हुए यह लोग मालदीव के लोगों को मदद मुहैया कराते रहते हैं। इसमें भी मेडिकल मदद ज्यादा है। अगर मालदीव में मौजूद भारतीय मिशनों पर नजर डालें तो मेडिकल इवैक्युएशन के 461, सर्च और रेस्क्यू में 148, हवाई गश्त में 69 और मिले-जुले में 22 की संख्या है। यह आंकड़ा 2019 से 2023 के बीच का है। अगर कुल मिशंस की बात करें तो 2019 से 2022 के बीच इसमें बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। साल 2022 में 262 मिशन रहे हैं, हालांकि 2023 में इसमें कमी आई और 159 मिशन ही यहां मौजूद रहे।

खतरे में है अस्तित्व
अगर मालदीव की बात करें तो यहां पर हालात बहुत ज्यादा प्रतिकूल हैं। जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्री स्तर बढ़ रहा है और मालदीव का अस्तित्व ही खतरे में है। ऐसे में खतरा पैदा होने पर भारत उसके लिए बड़ा मददगार हो सकता है। वहीं, भारत मालदीव में निवेश भी खूब कर रहा है। वह यहां पर 1.5 बिलियन डॉलर्स लगा चुका है। ऐसे में मुइजू को भरोसा रखना होगा कि भारत मालदीव का बड़ा दोस्त है। उसका रणनीतिक निवेश, मानववादी कोशिशें और कमिटमेंट क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम हैं। मुइजू को ‘आउट इंडिया’ कैंपेन छोड़कर भारत के साथ संबंध बेहतर बनाने की कोशिश पर ध्यान देना चाहिए।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें