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पहले भेजा दो नादियों का पानी, अब रामजन्मभूमि के लिए मिट्टी भेज रहा थाइलैंड; जानिए राम से कनेक्शन

स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल मिट्टी तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत और थाइलैंड के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधन है।

पहले भेजा दो नादियों का पानी, अब रामजन्मभूमि के लिए मिट्टी भेज रहा थाइलैंड; जानिए राम से कनेक्शन
Amit Kumarएएनआई,बैंकॉकThu, 30 Nov 2023 10:16 PM
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थाइलैंड अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन से पहले रामजन्मभूमि के लिए मिट्टी भेज रहा है। सांस्कृतिक महत्व से इसे बेहद खास माना जा रहा है। इससे पहले थाइलैंड की दो नदियों से भगवान राम के मंदिर में पानी भेजा गया था। विश्व हिंदू फाउंडेशन (डब्ल्यूएचएफ) के संस्थापक और वैश्विक अध्यक्ष स्वामी विज्ञानानंद ने एएनआई के साथ एक विशेष बातचीत में कहा कि इस अद्वितीय संबंध का उद्देश्य थाइलैंड और भारत के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है। अयोध्या में तैयार हो रहे राम मंदिर को भव्य और खास बनाने के लिए जोर-शोर से तैयारी की जारी है।  

22 जनवरी, 2024 को रामलला का अभिषेक समारोह होगा। इसकी तैयारी में, थाइलैंड से मिट्टी राम जन्मभूमि के पवित्र स्थल पर भेजी जा रही है। स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि यह पहल विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) द्वारा वीएचपी के थाइलैंड चैप्टर के अध्यक्ष सुशील कुमार सराफ की ओर से की जा रही है। इससे पहले News18 से बात करते हुए प्रमुख कारोबारी और थाई चैंबर ऑफ कॉमर्स के सलाहकार सुशील कुमार सराफ ने कहा, "हमने यहां बैंकॉक में श्री राम मंदिर की प्रतिकृति बनाई है, ताकि लोग दर्शन कर सकें। हमें भी अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए कई लोग वहां जाएंगे।”

स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि मिट्टी भेजे जाने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग केवल मिट्टी तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "भारत और थाइलैंड के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधन है। (यहां के) राजा भगवान राम के वंशज हैं। यहां के हर राजा के नाम के साथ राम की उपाधि भी है, जो यहां की एक पुरानी परंपरा है। थाइलैंड में बैंकॉक एशियाई दक्षिणपूर्व देश का हिस्सा है जहां समृद्ध हिंदू सांस्कृतिक विरासत मौजूद है, यही कारण है कि उन्होंने यहां विश्व हिंदू कांग्रेस आयोजित करने की योजना बनाई है।"

स्वामी विज्ञानानंद ने कहा, "हमने 51 देशों की पहचान की है जो अयोध्या में भगवान राम के अभिषेक के गवाह बनेंगे। सुशील कुमार सराफ और मैं भी अयोध्या में मौजूद रहेंगे।" अगले साल 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के निर्धारित अभिषेक पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, विश्व हिंदू कांग्रेस के मुख्य आयोजक स्वामी विज्ञानानंद ने एएनआई को बताया कि समारोह का बैंकॉक में सीधा प्रसारण किया जाएगा और दुनिया भर से हिंदू कार्यक्रम, कीर्तन, भजन, पूजा और पाठ में जुटेंगे।

उन्होंने कहा, "हमने अयोध्या से प्रसाद (भगवान को चढ़ाया जाने वाला भोजन) ऑर्डर किया है। यहां अयोध्या मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई है। हम अयोध्या से राम लला के जन्मस्थान की एक तस्वीर भी लाए हैं। तस्वीर की प्रतियां (सम्मेलन में भाग ले रहे) सभी प्रतिनिधियों के साथ साझा की जाएंगी। राम मंदिर के अभिषेक से पहले अयोध्या में उत्सव का माहौल दुनिया भर में फैलना चाहिए।'' 

थाइलैंड का एक प्रसिद्ध शहर अयुत्या के नाम से जाना जाता था। जहां के राजा 'रामतिबोधि' ("भगवान राम") की उपाधि धारण करते थे। अयुत्या को उस प्रसंग से जोड़ा गया है जिसमें रामायण में अयोध्या को भगवान राम की राजधानी के रूप में वर्णित किया गया है। अयुत्या को 1767 में बर्मी सेनाओं ने लूट लिया और लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।

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