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अफगानिस्तान में भुखमरी की नौबत, मजदूरों को पैसे नहीं गेहूं बांटेगा तालिबान

हिन्दुस्तान टाइम्स,काबुलGaurav Kala
Mon, 25 Oct 2021 08:12 PM
अफगानिस्तान में भुखमरी की नौबत, मजदूरों को पैसे नहीं गेहूं बांटेगा तालिबान

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अफगानिस्तान में तालिबान के तख्तापलट के बाद से हालात खराब होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में लोग भुखमरी के कगार पर हैं। देश में आर्थिक संकट के बीच तालिबान सरकार ने ऐलान किया है कि वो मजदूरों को मजदूरी के लिए पैसे के बदले गेहूं देगा। 

तालिबान सरकार को मजदूरों को पारिश्रमिक के तौर पर रुपए की जगह गेहूं देने के लिए विवश होना पड़ रहा है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान की अंतरिम सरकार ने लोगों को श्रम के बदले गेहूं देने की घोषणा की है। तालिबान ने इस योजना के जरिए काबुल में लगभग 40 हजार लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। यह योजना अफगानिस्तान के कई प्रमुख शहरों में लागू की जाएगी। 

तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि यह योजना देश में बेरोजगारी से लड़ने और भूख से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के तहत काबुल में दो महीने में करीब 11,600 टन गेहूं का वितरण किया जाएगा। इसके अलावा हेरात, जलालाबाद, कंधार, मजार-ए-शरीफ और पोल-ए-खोमरी सहित देश के बाकी शहरों में 55,000 टन गेहूं वितरित किए जाने की योजना है। इस योजना के तहत सूखे से निपटने के इंतजाम किए जाएंगे। 

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने एक बयान में कहा, हम अफगानिस्तान में सामूहिक विफलता नहीं होने दे सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान में इस संकट को आपदा बनने से पहले रोकना चाहिए। 

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट से पता चलता है कि अफगानिस्तान में लगभग 19 मिलियन लोगों ने फसल के बाद के मौसम के दो महीनों के दौरान खाने का संकट देखा है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 30% अधिक है। रिपोर्ट में यह आशंका भी जताई गई है कि नवंबर 2021 से मार्च 2022 तक अफगानिस्तान की आधी से अधिक आबादी को खाने का संकट झेलना पड़ सकता है।

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