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अंतरिक्ष में फंस गईं सुनीता विलियम्स! एयरक्राफ्ट में खराबी की वजह से नहीं हो पा रही वापसी

5 जूुन को बोइंग स्टारलाइनर से सुनीता विलियम्स और एक अन्य अंतरिक्ष यात्री आईएसएस के लिए रवाना हुए थे। हालांकि अब वापसी में उनको दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

अंतरिक्ष में फंस गईं सुनीता विलियम्स! एयरक्राफ्ट में खराबी की वजह से नहीं हो पा रही वापसी
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,वॉशिंगटनSun, 23 Jun 2024 12:22 PM
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बोइंग स्टारलाइनर के अंतरिक्षयात्रियों ने इस बार जबसे यात्रा का प्लान बनाया है, कुछ ना कुछ दिक्कतें सामने आ रही हैं। दो बार तकनीकी खराबी आने के बाद तीसरी बार में दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस सेंटर (ISS) के लिए रवाना किया गया था। अब आईएसएस से वापस आने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी दिक्कत की वजह से उन्हें धरती पर लौटने में देरी हो रही है। वहीं इंजीनियरों का कहना है कि जल्द ही स्पेसक्राफ्ट की कमी दूर की जाएगी और उन्हें धरती पर वापस लाया जाएगा। 

बता दें कि स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से इस बार बुच विलमोर और भारतीय मूल की सुनिता विलियम्स आईएसएस पहुंची थीं। स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट का रिटर्न मॉड्यूल आईएसएस के हार्मोनी मॉड्यूल पर रुका है। हालांकि हार्मोनी मॉड्यूल में सीमित ईंधन ही बचा है। वहीं स्टारलाइन में पांच जगहों से हीलियम के रिसाव की वजह से वापसी की यात्रा नहीं शुरू हो पा रही है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक स्टारलाइनर में पांच थ्रस्टर हैं जिन्होंने काम करना बंद कर दिया था। 

इसी बीच सोशल मीडिया पर यूजर्स कह रहे हैं कि स्टारलाइनर से अंतरिक्ष यात्रा बेहद खतरनाक है। अब स्पेस एक्स को अंतरिक्षयात्रियों को वापस लाने के लिए भेजा जाना चाहिए। अंतरिक्ष विज्ञानी जोनाथन मैकड्वेल ने कहा कि अगर कुछ थ्रस्टर काम नहीं भी रकरते हैं तब भी दोनों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर सुरक्षित वापस आ सकते हैं। इन छोटी समस्याओँ से लैंडिंग पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। सबसे बुरा तो यही होगा कि अंतरिक्ष यात्री आईएसएस में मस्क के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का इंतजार करें। 

बता दें कि दो असफल कोशिशों के बाद 5 जून को दोनों अंतरिक्षयात्रियों को लेकर बोइंग स्टारलाइनर रवाना हुआ था। 25 घंटे की यात्रा के दौरान पता चला था कि स्पेसक्राफ्ट में पांच जगह से हीलियम लीक है। वहीं पांच थ्रस्टर ने काम करना बंद कर दिया था। बोइंग स्टारलाइनर प्रोग्राम के मैनेजर ने खुद कहा था कि उनका हीलियम सिस्टम उस तरह काम नहीं कर रहा है, जो सोचकर उसे डिजाइन किया गया था। इंजीनियरों को भी पता नहीं है कि आखिर दिक्कत क्या आ रही है।