चांद से टकरा सकता है स्पेसएक्स का छोड़ा गया रॉकेट
स्पेसएक्स का बेकार रॉकेट चंद्रमा से टकराने की राह पर है। यह घटना विज्ञान और अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए अद्वितीय अवसर पेश करती है। रॉकेट की टक्कर से एक नया गड्ढा बनेगा और धूल फैल जाएगी। चंद्रमा पर टकराने वाली वस्तुओं के भविष्य के प्रभावों पर चिंता जताई गई है।

स्पेसएक्स का एक बेकार हो चुका रॉकेट अब चंद्रमा से टकराने की राह पर है। यह रॉकेट एक साल से अधिक समय पहले दो चंद्र लैंडर को अंतरिक्ष में भेजने के बाद अंतरिक्ष में भटक रहा था। रॉकेट का ऊपरी हिस्सा बुधवार को अनजाने में चंद्रमा से टकराएगा। इस टक्कर से चंद्रमा की सतह पर एक नया गड्ढा (क्रेटर) बनेगा और धूल व पत्थरों का बड़ा गुबार उठेगा। वैज्ञानिक और अंतरिक्ष प्रेमी इस घटना को देखने के लिए उत्सुक हैं।
टकराव की गति
अंतरिक्ष ट्रैकिंग विशेषज्ञ बिल ग्रे के अनुसार, रॉकेट 5,400 मील प्रति घंटा (करीब 8,700 किलोमीटर प्रति घंटा) ध्वनि की गति से लगभग सात गुना तेज रफ्तार से चंद्रमा के आइंस्टीन क्रेटर के पास टकराएगा। वैज्ञानिक का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि पृथ्वी की कक्षा में बढ़ता अंतरिक्ष मलबा भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।
अतीत में हुई घटनाएँ
2022 में भी हुई थी ऐसी घटना। यह दूसरी बार होगा, जब किसी निष्क्रिय रॉकेट के चंद्रमा से गलती से टकराने की पुष्टि हुई। इससे पहले 2022 में चीन के एक रॉकेट का हिस्सा चंद्रमा के दूर वाले हिस्से पर टकराया था और वहां दो गड्ढे बन गए थे।
टकराव के दृश्य
वैज्ञानिकों के लिए अच्छी बात यह है कि इस बार टक्कर चंद्रमा के उस हिस्से पर होगी, जो पृथ्वी से दिखाई देता है। इसकी टक्कर की ऊर्जा करीब तीन टन टीएनटी विस्फोटक के बराबर होगी। टक्कर के समय पैदा होने वाली रोशनी एक सेकंड से भी कम समय तक रहेगी और संभवतः इतनी हल्की होगी कि नंगी आंखों से दिखाई नहीं देगी। हालांकि टक्कर से निकलने वाली धूल और मलबा कई किलोमीटर तक अंतरिक्ष में फैल सकता है और दूरबीनों से देखा जा सकेगा।
गड्ढे का आकार
भविष्य में चंद्रमा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए इस तरह की टक्कर से उड़ने वाला मलबा कितना खतरनाक हो सकता है। टक्कर से करीब 90 फुट चौड़ा और 16 फुट गहरा गड्ढा बनेगा। यह पृथ्वी से दिखाई नहीं देगा, लेकिन चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे अंतरिक्ष यान इसे देख सकेंगे।
चंद्रमा पर टकराने वाले वस्त्र
चंद्रमा से टकराती रहती हैं वस्तुएं। वैज्ञानिकों का कहना है कि उल्कापिंड और अन्य प्राकृतिक वस्तुएं बिना किसी चेतावनी के चंद्रमा से टकराती रहती हैं। 2009 में नासा ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास बर्फ की खोज के लिए अपने एलक्रॉस अंतरिक्ष यान और उसके ऊपरी हिस्से को जानबूझकर चंद्रमा से टकराया था।
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