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रोहिंग्या संकट: बांग्लादेश के राहत शिविर में तीन और शरणार्थियों की मौत

बांग्लादेश में राहत शिविरों में दो समूहों के बीच झड़प के बाद तीन रोहिंग्या शरणार्थियों की जान चली गई है। वहीं सात अन्य लोग घायल हो गए हैं। बांग्लादेश में लगभग दस लाख रोहिंग्या रहते हैं।

  रोहिंग्या संकट:  बांग्लादेश के राहत शिविर में तीन और शरणार्थियों की मौत
Jagritiलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीTue, 11 Jun 2024 04:07 PM
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बांग्लादेश में राहत शिविरों पर कब्जा करने लिए संघर्ष कर रहे समूहों के बीच झड़प के बाद कम से कम तीन रोहिंग्या शरणार्थियों की मौत हो गई है। वहीं सात लोग जख्मी भी हो गए हैं। बांग्लादेश में म्यांमार से आए इस मुस्लिम समुदाय के दस लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकतर म्यांमार में 2017 में हुई सैन्य कार्रवाई के बाद यहां आए थे। इनमें से अधिकांश शरणार्थी यहां के राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस साल, दो गुटों के बीच झड़पों में इजाफा हुआ है। सोमवार को यहां के कॉक्स बाजार में अराकान रोहिंग्या सल्वेशन आर्मी के लगभग सौ लोगों ने राहत शिविर की सुरक्षा में लगे लोगों पर हमला कर दिया। 

शिविरों में सुरक्षा के लिए तैनात सशस्त्र पुलिस बटालियन के कमांडिंग अधिकारी के मुताबिक उन्होंने शिविर के चारों ओर कांटेदार तार की बाड़ को काट दिया और शिविर की सुरक्षा कर रहे रोहिंग्याओं पर हमला कर दिया।" एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, "तीन रोहिंग्या मारे गए और सात घायल हो गए। जब ​​पुलिस मौके पर आई, तो एआरएसए के सदस्यों ने पुलिस पर भी हमला किया।" अधिकारियों ने यह भी बताया कि पीड़ितों को कई बार गोली मारी गई और चाकुओं से हमला किया गया। शिविरों में रोहिंग्या समुदाय के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मारे गए तीनों लोग रोहिंग्या सॉलिडेरिटी ऑर्गनाइजेशन (आरएसओ) के सदस्य थे। उन्होंने कहा, "शिविर में हर दिन और रात हत्याएं और गोलीबारी हो रही है। एआरएसए ने कल तीन आरएसओ को मार डाला। यहां कोई भी रोहिंग्या सुरक्षित नहीं है। एआरएसए और आरएसओ ने रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए शिविरों को नर्क बना दिया है।" 

राष्ट्रीय दैनिक प्रोथोम अलो की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल प्रतिद्वंद्वी आतंकवादी समूहों के बीच झड़पों में कम से कम 20 रोहिंग्या मारे गए हैं। अप्रैल से रोहिंग्या शिविरों में सुरक्षा में कमियां और भी ज्यादा नजर आने लगी हैं। रोहिंग्या समूहों ने म्यांमार में युद्ध के लिए युवा पुरुषों और लड़कों को जबरन भर्ती करने के अभियान शुरू किए हैं। पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के बीच प्रसारित और एएफपी की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1,500 रोहिंग्या को युद्ध में शामिल होने के लिए शिविरों से बाहर निकाला गया है। इस से चिंतित होकर रोहिंग्या समुदाय के नेताओं ने भर्ती छापों को रोकने के लिए शिविरों में गश्ती समूहों का गठन किया है।