कोरोना की मृत्यु दर गणना को लेकर उलझन में वैज्ञानिक, जानें क्यों

एजेंसी ,वाशिंगटन Last Modified: Wed, Sep 30 2020. 09:59 IST
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कोविड-19 महामारी से वैश्विक स्तर पर मौतों की संख्या 10 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। इसके बावजूद विशेषज्ञ अभी भी महामारी में संक्रमित रोगियों की मृत्यु दर की गणना के तरीके को लेकर उलझन में हैं। कोविड-19 की मृत्यु दर को बेहतर ढंग से समझने के लिए ये मुद्दे अहम हैं। 

मृत्यु दर की गणना कैसे की जाती है?
एक सही मृत्यु दर का मतलब संक्रमण के कुल मामलों के मुकाबले मौतों की तुलना करना, लेकिन असिम्प्टोमैटिक मामलों का पूरी तरह से आकलन मुश्किल है। क्योंकि, बहुत से लोग ऐसे हैं जो संक्रमित हो जाते हैं लेकिन लक्षणों का अनुभव नहीं करते हैं। 

संक्रमण के कुल मामले पुष्ट मामलों से अधिक : 
वैज्ञानिकों का कहना है कि संक्रमण के कुल मामलों की संख्या विश्व स्तर पर पुष्टि किए गए तीन करोड़ मामलों की तुलना में कहीं अधिक है। कई विशेषज्ञों का मानना ​​है कि कोरोना संक्रमित लोगों में से 0.5% से 1% तक की मौत हो रही है। शोधकर्ताओं ने आयु वर्ग के अनुसार जोखिम का स्तर खोजा तो पता चलता है कि कम उम्र के लोगों और बच्चों में गंभीर बीमारी की संभावना कम है। 

बुजुर्गों की मृत्यु दर ज्यादा : 
वाशिंगटन विश्वविद्यालय, सिएटल में इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के निदेशक डॉ. क्रिस्टोफर मरे के अनुसार, 20 साल से कम उम्र के प्रति 10,000 मरीजों पर एक मौत हुई है। जबकि 85 साल की उम्र वाले प्रत्येक छह में से एक मरीज की मौत हुई है। 

केस फेटेलिटी रेट क्या है? 
कोरोना वायरस परीक्षण द्वारा पुष्टि किए गए नए संक्रमणों की संख्या के मुकाबले गणना किए जाने पर मृत्यु दर में स्पष्ट गिरावट दिखती है। रॉयटर्स के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका जैसी जगहों पर केस फेटेलिटी रेट नाटकीय रूप से कम हुई है। अप्रैल में यह 6.6% थी जो अगस्त में सिर्फ 2% रह गई है। 

फेटेलिटी रेट में गिरावट के कारण :
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट महामारी के शुरुआती दिनों की तुलना में बीमारी के हल्के लक्षण या बिना लक्षण वाले लोगों का पता लगाने के लिए अब व्यापक रूप से की जा रही टेस्टिंग के कारण है। वहीं, इस गिरावट में गंभीर मरीजों के इलाज में सुधार और उच्चतम जोखिम वाले समूह के लोगों की सुरक्षा के प्रयासों का भी योगदान है। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, बाल्टिमोर के सेंटर फॉर हेल्थ सिक्योरिटी के डॉ.  अमेश अदलजा कहते हैं कि अब हम संभावित जटिलताओं को पहचानने और उनके इलाज के बारे में अधिक जानते हैं। यदि कोई कोरोना संक्रमित हो रहा है तो वह मार्च के अपेक्षा अब बेहतर उपचार प्राप्त करेगा। 

व्यक्तिगत और सरकारों के लिए इसके मायने : 
व्यक्तिगत और सरकारी स्तर पर कोरोना से बचने के लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता है, क्योंकि कुछ देशों में संक्रमण की दूसरी लहर आनी शुरू हो चुकी है। उदाहरण के लिए, फ्रांस में शोधकर्ताओं का अनुमान है कि मई के अंत की तुलना में जुलाई के अंत तक देश के मामले में मृत्यु दर 46% तक गिर गई। इसके पीछे ज्यादा परीक्षण, चिकित्सा देखभाल में सुधार और संक्रमण का ज्यादातर युवा लोगों में मिलना है, जिनमें गंभीर बीमारी की संभावना कम होती है। फ्रांस के मोंटपेलियर विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता मिर्केया सोफिया ने कहा कि अब हम अस्पताल और आईसीयू पंजीकरणों में एक नए सिरे से वृद्धि देख रहे हैं, जिसका अर्थ है कि यह विसंगति समाप्त होने वाली है। हमें इसके कारण तलाशने और समझने होंगे। 

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