लाइबेरिया में टॉप विवि शिक्षकों को ट्रेंड कर रहे भागलपुर के सत्यम
हिन्दुस्तान विशेष 120 शिक्षकों को 7500 बच्चों के लिए कर रहे प्रशिक्षित ग्लोबल टीचर

बलराम मिश्र की रिपोर्ट भागलपुर। विश्व की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटी अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर की डिग्री हासिल कर कोई भी ऐशो आराम की जिंदगी जीने के लिए बड़ी कंपनियों में नौकरी कर सकता है, लेकिन भागलपुर के भीखनपुर, इशाकचक निवासी सत्यम मिश्रा नौकरी की जगह संकटग्रस्त देशों में शिक्षा के लिए काम करने वाली संस्था टीच फॉर ऑल से जुड़कर अलग-अलग देशों में जरूरतमंद शिक्षकों और छात्रों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। 18 अलग-अलग देशों में काम करने के बाद अब विश्व के सबसे गरीब देशों में एक पश्चिम अफ्रीका के देश लाइबेरिया के टॉप विवि के 120 शिक्षकों को प्रशिक्षत कर भारत का मान बढ़ा रहे हैं।
लाइबेरिया में प्रशिक्षण
सत्यम ने लाइबेरिया से फोन पर हिंदुस्तान से विशेष बातचीत में बताया कि वे लाइबेरिया में 120 शिक्षकों को डिजिटल लिटरेसी एंड एआई पर आधारित प्रशिक्षण दे रहे हैं। ये शिक्षक लाइबेरिया के 15 से 12 काउंटी में 7500 बच्चों को इस संबंध में पढ़ाएंगे। साथ ही वे अपने साथी शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक वे पहुंच सकें। सत्यम मिश्रा को टीच फॉर ऑल के माध्यम से टीच फॉर लाइबेरिया के तहत समर इंस्टच्यूट में बतौर निदेशक भेजा गया है। प्रशिक्षण की शुरुआत पर भारतीय दूतावास के भारतीय राजदूत मनोज बिहार वर्मा पहुंचे थे। उनसे सत्यम ने भारत और लाइबेरिया के बीच के रिश्ते पर बातचीत हुई।
भारत और लाइबेरिया के रिश्ते
बातचीत में सत्यम ने बताया कि लाइबेरिया में युवा आबादी काफी है, लेकिन 14 साल गृह युद्ध सहित कई संकट झेलने के बाद स्थिति अच्छी नहीं है। भारत के लाइबेरिया से रिश्ते काफी अच्छे हैं। इसी कारण भारत सरकार हर साल लाइबेरियन छात्रों को देश के टॉप विवि में नामांकन कराती है, ताकि मास्टर और पीएचडी कर वे अपने देश को आगे बढ़ाने के लिए काम कर सकें। उन्होंने बताया संस्था टीच फॉर ऑल का भी यही उद्देश्य है। यह 2007 से काम कर रही है। 65 देशों में अलग-अलग माध्यमों से शिक्षा को बढ़ा रही है।
ग्लोबल टीचर अवार्ड
ग्लोबल टीचर अवार्ड के लिए नामित हुए थे सत्यम
सत्यम मिश्रा ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई माउंट असीसी से पूरी की है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद से वे लगातार अलग-अलग देशों के रिफ्यूजी कैंप में बच्चों को पढ़ाने में जुट गए। अब तक उन्होंने अलग-अलग देशों में 1500 से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। उनका चयन यूनेस्को ने विश्व स्तरीय ग्लोबल टीचर अवार्ड के लिए टॉप 50 में चुना था। उनके दादाजी पंडित निशिकांत मिश्रा स्वतंत्रता सेनानी थी, जबकि नाना डॉ. मोहन मिश्रा दरभंगा के प्रतिष्ठित नेत्र रोग विशेषज्ञ थे।


