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बाजार में जल्द उपलब्ध होगी कैंसर वैक्सीन, सफलता के बहुत करीब वैज्ञानिक; राष्ट्रपति पुतिन का बड़ा दावा

व्लादिमीर पुतिन ने यह नहीं बताया कि वैक्सीन किस प्रकार के कैंसर के इलाज में अधिक कारगर होगी और यह कैसे अपना असर दिखाएगी। इस वक्त कई देश और कंपनियां कैंसर का टीका बनाने पर काम कर रही हैं।

बाजार में जल्द उपलब्ध होगी कैंसर वैक्सीन, सफलता के बहुत करीब वैज्ञानिक; राष्ट्रपति पुतिन का बड़ा दावा
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,मास्कोFri, 16 Feb 2024 07:04 PM
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बाजार में अब जल्द ही कैंसर की वैक्सीन भी उपलब्ध होने जा रही है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद इस बात का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि रूसी वैज्ञानिक कैंसर को लेकर वैक्सीन बनाने के करीब हैं जो जल्द ही रोगियों के लिए उपलब्ध हो सकती है। पुतिन ने टेलीविजन पर प्रसारित संदेश में कहा, 'हम कैंसर के टीके और न्यू जनरेशन की इम्यूनोमॉड्यूलेटरी दवाओं के निर्माण के बहुत करीब हैं। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही इन्हें इंडिविजुअल थेरेपी के तरीकों के रूप में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाएगा।' रूसी राष्ट्रपति ने भविष्य की तकनीकों पर मॉस्को फोरम में बोलते ये बातें कहीं।

व्लादिमीर पुतिन ने यह नहीं बताया कि वैक्सीन किस प्रकार के कैंसर के इलाज में अधिक कारगर होगी और यह कैसे अपना असर दिखाएगी। मालूम हो कि कई देश और कंपनियां कैंसर का टीका बनाने पर काम कर रही हैं। पिछले साल ब्रिटिश सरकार ने कैंसर ट्रीटमेंट को लेकर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने के लिए जर्मनी स्थित बायोएनटेक के साथ करार किया था। इसका टारगेट 2030 तक 10,000 रोगियों तक पहुंचना है। फार्मास्युटिकल कंपनियां मॉडर्ना और मर्क एंड कंपनी भी एक्सपेरिमेंटल कैंसर वैक्सीन डेवलप कर रही हैं। इसके अध्ययन से पता चला कि 3 साल के इलाज के बाद मेलेनोमा (सबसे घातक त्वचा कैंसर) से मृत्यु की संभावना आधी हो गई।

भारत में कैंसर के 14.1 लाख नए मामले: WHO 
अगर भारत की बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2022 में देश में कैंसर के 14.1 लाख से अधिक नए मामले सामने आए। इस रोग के कारण 9.1 लाख से अधिक मौतें हुईं। कैंसर पर शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसी (आईएआरएसी) के मुताबिक पुरुषों में होंठ, मुंह और फेफड़े का कैंसर सबसे आम था, जो नए मामलों का क्रमश: 15.6 प्रतिशत और 8.5 प्रतिशत है। महिलाओं में स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर सबसे आम थे। नए मामलों में इनकी हिस्सेदारी क्रमश: 27 और 18 प्रतिशत थी। आईएआरसी, डब्ल्यूएचओ की कैंसर एजेंसी है। यह भी पाया गया कि कैंसर से पीड़ित होने की जानकारी मिलने के बाद 5 साल तक जीवित रहने वाले लोगों की संख्या भारत में करीब 32.6 लाख है।

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