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रूस और यूक्रेन में शुरू हुई बात, अनाज के निर्यात पर बन सकती है सहमति

यूक्रेन के बंदरगाहों के ब्लॉक हो जाने और कम आय वाले देशों को अनाज निर्यात नहीं कर पाने के कारण कीमतों में और वृद्धि हुई। इससे लाखों लोग जल्दी ही गरीबी रेखा से नीचे चले गए।

रूस और यूक्रेन में शुरू हुई बात, अनाज के निर्यात पर बन सकती है सहमति
Amit Kumarएजेंसियां,इस्तांबुलWed, 13 Jul 2022 05:29 PM

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यूक्रेन पर रूसी अटैक के बाद से पूरी दुनिया पर भुखमरी का संकट मंडरा रहा है। युद्ध के चलते यूक्रेन से अनाज का निर्यात बाधित है। हालांकि अब रूस और यूक्रेन ने इस संकट से निपटने के लिए बातचीत शुरू की है। रुकी हुई अनाज की डिलीवरी के लिए रूसी और यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों ने बुधवार को तुर्की के इस्तांबुल में बातचीत शुरू की है।

बता दें कि इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने 11 जुलाई को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ अलग-अलग फोन पर बात की थी। उन्होंने दोनों नेताओं से यूक्रेनी अनाज के सुरक्षित निर्यात को लेकर चर्चा की थी। इस फोन कॉल के बाद अब तुर्की में बेहद अहम बैठक हो रही है। तुर्की आवश्यक अनाज व्यापार को फिर से शुरू करने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। तुर्की की मेजबानी में हो रही वार्ता में संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है। 

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यूक्रेन और उसके सहयोगियों ने यूक्रेन के काला सागर बंदरगाहों को फिर से खोलने के लिए जोर दिया है। यूक्रेन का कहना है कि रूसी नाकाबंदी के कारण काला सागर बंदरगाह बंद हैं। इन बंदरगाहों से यूक्रेन लगभग पूरी दुनिया को गेहूं जैसे जरूरी अनाज का निर्यात करता है। यूक्रेन गेहूं व अन्य अनाज के लिए दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक देशों में से एक है। 

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसके कारण दुनिया भर में 7.1 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं।

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यूएनडीपी का अनुमान है कि युद्ध शुरू होने के बाद पहले तीन महीनों में 5.16 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए और वे प्रति दिन 1.90 डॉलर या उससे भी कम पैसे में जीवन यापन कर रहे हैं। यूक्रेन के बंदरगाहों के ब्लॉक हो जाने और कम आय वाले देशों को अनाज निर्यात नहीं कर पाने के कारण कीमतों में और वृद्धि हुई। इससे लाखों लोग जल्दी ही गरीबी रेखा से नीचे चले गए।

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