Ramadan 2023: मस्जिदों में लाउडस्‍पीकर पर 'रोक', लाइव टेलीकास्ट पर भी पाबंदी; रमजान पर सऊदी का फरमान

Mar 10, 2023 09:32 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिंदुस्तान, नई दिल्ली
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Ramadan 2023: नए नियमों के मुताबिक कोई लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं होगा, बिना आईडी के कोई एतिकाफ नहीं होगा, अजान का कोई लाइव टेलीकास्ट नहीं होगा और मस्जिदों के अंदर कोई इफ्तार नहीं होगा।

Ramadan 2023: मस्जिदों में लाउडस्‍पीकर पर 'रोक', लाइव टेलीकास्ट पर भी पाबंदी; रमजान पर सऊदी का फरमान

Ramadan 2023: मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र महीने रमजान की शुरुआत होने वाली है। इस बार सऊदी अरब ने रमजान को लेकर मक्का और मदीना में नियमों का ऐलान किया है। नए नियमों के मुताबिक कोई लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं होगा, बिना आईडी के कोई एतिकाफ नहीं होगा, अजान का कोई लाइव टेलीकास्ट नहीं होगा और मस्जिदों के अंदर कोई इफ्तार नहीं होगा।

इस्लामिक मामलों के मंत्री, दावा और मार्गदर्शन शेख डॉ अब्दुललतीफ बिन अब्दुलअज़ीज़ अल-अलशेख ने 10 सूत्रीय दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने नमाजियों से यह भी अनुरोध किया कि वे बच्चों को मस्जिदों में न लाएं क्योंकि इससे नमाजियों को परेशानी होगी और उनकी इज्जत खत्म हो जाएगी। एतिकाफ इस्लाम में प्रथा है जहां लोग रमजान के अंतिम 10 दिनों के दौरान एक मस्जिद में अल्लाह की इबादत के लिए अपना समय समर्पित करने के इरादे से खुद को अलग कर लेते हैं।

इस्‍लामिक मंत्रालय ने कहा कि शाम के वक्त की इबादत तरावीह और रात की इबादत तहाज्जुद को पर्याप्‍त समय में पूरा किया जाए ताकि रोजेदारों को कोई दिक्‍कत नहीं हो। इसके अलावा मस्जिद के अंदर फोटोग्राफी और अजान के लाइव टेलीकास्ट पर भी रोक लगाई गई है। इसके अलावा रोजेदारों को बच्‍चों को मस्जिद के अंदर लाने पर रोक लगाई गई है। सरकार का कहना है कि इससे बाधा उत्‍पन्‍न होती है और इबादत में परेशानी आती है। इससे पहले पिछले साल भी मस्जिदों में अजान के दौरान लाउडस्‍पीकर की आवाज को कम कर दिया गया था जो इस साल भी लागू रहेगा।

नियमों की हो रही है आलोचना

प्रतिबंधों पर दुनिया भर के कई मुसलमानों से नाराजगी और प्रतिक्रिया व्यक्त की है, आलोचकों ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के तहत सऊदी सरकार की तरफ से लागू किए गए प्रतिबंधों को इस्लामी प्रभाव को सीमित करने वाला बताया। 

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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