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5 अगस्त, 2020|8:41|IST

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ओली को बचाने के लिए चीन दे रहा दखल, नेपाल की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन, गो बैक चाइना के नारे

protest against china

नेपाल की घरेलू राजनीति में चीन के बढ़ते दखल का विरोध शुरू हो गया है। ड्रैगन के इशारे पर सरकार चला रहे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा तो चीन ने परेशान हो उठा है। नेपाल में चीन की राजदूत हाउ यांकी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को एकजुट करने में जुटी हैं। एक संप्रभु देश के घरेलू मामलों में इस तरह की दखल को लेकर अब विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार को नेपाल विद्यार्थी संघ के सदस्यों ने हाथों में पोस्टर लेकर विरोध किया।  

स्थानीय मीडिया हाउस कांतिपुर ने जो तस्वीरें जारी की हैं उनमें दिख रहे पोस्टरों पर गो बैक चाइना और नो इन्टर्फिरन्स जैसे नारे लिखे गए थे। नेपाल की मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के स्टूडेंट विंग के सदस्यों ने कहा, ''चीन की राजदूत को दूतावास में रहना चाहिए, हमारे नेताओं के घरों में नहीं। यांकी चुप रहें।'' यांकी इन दिनों काठमांडू में काफी सक्रिय हैं और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करके ओली के लिए कवच बनने का प्रयास कर रही हैं।

रविवार को चीनी राजदूत ने वरिष्ठ एनसीपी नेता माधव कुमार नेपाल से मुलाकात की थी और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की थी। उन्होंने उसी दिन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की थी। नेपाल और खनाल के करीबियों ने बताया कि इन दोनों नेताओं ने देश की नवीनतम राजनीतिक स्थिति पर चीनी राजदूत के साथ चर्चा की। उन्होने उसका ब्योरा नहीं दिया।

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कई नेताओें ने चीन की राजदूत की सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ इतनी सारी बैठकें करने को नेपाल के अंदरूनी राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है। पूर्व विदेश मंत्री और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष कमल थापा ने ट्वीट किया, '' क्या रिमोट कंट्रोल से संचालित लोकतांत्रिक गणराज्य से नेपाल के लोग लाभान्वित होंगे?''

यह पहली बार नहीं है कि चीनी राजदूत ने संकट के समय नेपाल के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया है। करीब डेढ़ महीने पहले जब एनसीपी की अंदरूनी कलह शीर्ष पर पहुंच गई थी तब होउ ने राष्ट्रपति भंडारी, प्रधानमंत्री ओली और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड एवं माधव नेपाल से अलग अलग बैठकें की थी।

(तस्वीरें साभार- कांतिपुर)

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  • Web Title:protest against china in nepal for interference in domestic politics