भारत-अमेरिका के बीच जल्द व्यापार समझौते के संकेत
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच मनीला में हुई बैठक में व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने पर चर्चा की गई। समझौता 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। हालांकि, दोनों पक्ष बीते करीब तीन महीने से कहते आ रहे हैं कि समझौते से जुड़े करीब सभी बिंदुओं पर सहमति बन गई है। उचित समय पर समझौते की घोषणा की जाएगी।
बैठक पर चर्चा
फिलीपींस की राजधानी मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की बैठक में भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द अंतिम रूप देने पर जोर दिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, अंतरिम व्यापार समझौता लगभग तैयार है और दोनों पक्ष इसे जल्द लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। बैठक में दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की स्थिति पर भी चर्चा की। साथ ही, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई पिछली सहमतियों के अनुरूप प्रमुख रक्षा समझौतों को जल्द पूरा करने पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बातचीत का इतिहास
पिछले साल से चल रही है बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर औपचारिक बातचीत पिछले वर्ष फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद शुरू हुई थी। दोनों देशों ने 2025 के अंत तक पहले चरण का समझौता करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद के कारण इसमें देरी हुई। अब तक दोनों देशों के बीच पांच दौर की औपचारिक वार्ता हो चुकी है। इसके अलावा कई तकनीकी और ऑनलाइन बैठकें भी हुई हैं। इनमें टैरिफ (आयात-निर्यात शुल्क), कृषि, डिजिटल व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच जैसे विषयों पर चर्चा हुई है।
समझौते का लक्ष्य
समझौते का लक्ष्य
दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाकर 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना।
आयात-निर्यात पर शुल्क (टैरिफ) और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना।
भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में और अमेरिकी उत्पादों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच देना।
निवेश, सप्लाई चेन, डिजिटल व्यापार, agriculture, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना।
पहले चरण में अंतरिम व्यापार समझौते को लागू कर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता तैयार करना।


