प्रधानमंत्री मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा कूटनीतिक एवं व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते के प्रभावी होने की संभावना है और निवेश संबंधी अनुबंध भी हो सकते हैं। न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था में विविधिकरण लाने के प्रयास जारी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। हिंद प्रशांत क्षेत्र में न्यूजीलैंड भारत के दृष्टिकोण का न सिर्फ खुलकर समर्थन करता है बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का भी पक्षधर है। न्यूजीलैंड चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता को कम करना चाहता है। भारत के प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा 40 सालों के बाद हो रहा है। ऐसे वक्त में यह यात्रा हो रही है जब हाल में दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता हुआ है जिसके लागू करने की तैयारी चल रही है। भारत-न्यूजीलैंड में मुक्त व्यापार समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। इससे पूर्व 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उससे पहले 1968 में इंदिरा गांधी ने न्यूजलैंड की यात्रा की थी। वर्ष 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वहां की यात्रा की थी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री पिछले साल भारत की यात्रा पर आए थे जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को दर्शाता है।
बाजार का विविधिकरण करने में जुटा
कूटनीतिक जानकारों के अनुसार न्यूजीलैंड के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता व्यापारिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। दरअसल, अभी तक न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था चीन पर निर्भर है। वह 39 अरब डालर के कृषि एवं समुद्री उत्पाद चीन को सालाना निर्यात करता है तथा बड़े पैमाने पर वहां से दूसरी वस्तुएं आयात भी करता है। लेकिन अब वह अपने बाजार का विविधिकरण करने की दिशा में बढ़ रहा है। इसलिए भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है। न्यूजीलैंड को लगता है कि उसकी अर्थव्यवस्था की चीन पर ज्यादा निर्भरता ठीक नहीं है। हालांकि रक्षा मामले में न्यूजीलैंड चीन पर निर्भर नहीं है तथा वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति रखता है।
द्विपक्षीय व्यापार में तेजी का अनुमान
भारत और न्यूजीलैंड के बीच अभी द्विपक्षीय व्यापार 2.25 अरब डॉलर सालाना है। व्यापार समझौते के लागू होने के बाद इसके तेजी से बढ़ने की संभावना है। 2030 तक दोनों देशों ने व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। व्यापार समझौते के एक प्रावधान के तहत ही न्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डालर का निवेश करेगा। हिंद प्रशांत क्षेत्र देश होने के नाते न्यूजीलैंड और भारत में रक्षा सहयोग भी बढ़ रहा है तथा इस यात्रा के दौरान कुछ नए कदमों का ऐलान हो सकता है। न्यूजीलैंड भारत के इंडो-पैसेफिक इनीशिएटिव, समुद्री सुरक्षा, आतंक के खिलाफ मुहिम तथा संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास में भारत के साथ कार्य कर रहा है।
अनुसंधान पर करता है मोटा खर्च
न्यूजीलैंड ने खेती, पशुपालन और खेलों क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किया है। वह अपनी जीडीपी का 1.5 फीसदी अनुसंधान पर खर्च करता है। इसलिए भारत उसके साथ इन क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ाने का पक्षधर है। न्यूजीलैंड भारत में कीवी फ्रूट, सेब, नाशपाती तथा शहद को लेकर नवाचार परियोजनाएं शुरू करने की प्रक्रिया में है। इसके तहत उत्तराखंड एवं नगालैंड में कीवी फ्रूट का सेंटर आफ एक्सीलैंस बना रहा। इस प्रकार दोनों देश खेलों के क्षेत्र में भी इस प्रकार का संयुक्त उपक्रम शुरू करने की योजना बना रहे हैं। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के तीन लाख से अधिक लोग हैं जो कुल आबादी का छह फीसदी हैं। भारतीय मूल के लोगों ने वहां की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था में महतव्पूर्ण भूमिका निभाई है जो दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की मजूबती प्रदान कर रहे हैं।
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Madan Jairaप्रिंट मीडिया में 32 साल से कार्य करने का अनुभव। करीब 26 सालों से नेशनल पालिटिकल ब्यूरो में सक्रिय। केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राजनीतिक दलों, क्लाईमेट चेंज, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे विषयों पर लंबे समय तक कार्य किया। मौजूदा समय में रक्षा तथा विदेश मामलों पर काम का लंबा अनुभव। साथ में राजनीतिक घटनाओं का विश्लेषण। संसद की रिपेर्टिंग का भी 20 सालों का अनुभव करीब दस सालों से नेशनल ब्यूरो का संचालन। देश के बाहर भी अनेक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों के कवरेज का अनुभव।
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