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3 महीने तक फोन कॉल, NSA लेवल की VC; फिर भी नेतन्याहू ने बाइडेन को कैसे फंसा दिया

Israel-US Tension: जब इजरायल ने अमेरिकी सलाह मानने से इनकार कर दिया, तब अमेरिकी प्रशासन को यह बात सार्वजनिक करनी पड़ी कि वह इजरायल को हथियारों की सप्लाई रोकने जा रहा है।

3 महीने तक फोन कॉल, NSA लेवल की VC; फिर भी नेतन्याहू ने बाइडेन को कैसे फंसा दिया
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 10 May 2024 04:04 PM
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गाजा के दक्षिणी शहर रफाह को खत्म करने की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कोशिशों और कसम से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन नाराज हो गए हैं। बाइडेन ने धमकी दी है कि अगर इजरायल ने रफाह पर हमले किए तो हथियारों की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में खटास और तनातनी का ये दौर तीन महीने तक फोन पर लगातार हुई बातचीत और दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकारों की दर्जनों वर्चुअल और फिजिकल  मीटिंग्स के बाद आया है।

CNN की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा में युद्ध विराम से लेकर रफाह शहर में इजरायल के हमलों को रोकने तक के मुद्दों पर मध्य फरवरी से लेकर हाल के दिनों तक राष्ट्रपति जो बाइडेन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच टेलीफोन पर बातचीत होती रही है। बावजूद इसके इजरायल ने अमेरिका की उस सलाह को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें अमेरिका ने गाजा के घनी आबादी वाले दक्षिणी शहर रफाह पर आक्रमण करने की अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। अमेरिका ने कहा था कि मानवीय सहायता के लिए महत्वपूर्ण है।

जब इजरायल ने अमेरिकी सलाह मानने से इनकार कर दिया, तब अमेरिकी प्रशासन को यह बात सार्वजनिक करनी पड़ी कि वह इजरायल को हथियारों की सप्लाई रोकने जा रहा है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि इससे पहले तक यही समझा जा रहा था कि इजरायल की सरकार ने अमेरिकी सलाह को अच्छी तरह से समझ लिया है लेकिन जब इजरायल ने अब रफाह पर हमले की तैयारी तेज कर दी, तब समझा गया कि इजरायल अपनी हठ पर कायम है। 7 अक्तूबर को हमास के इजरायल पर हमले और उसके जवाब में गाजा पर इजरायली हमलों के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब अमेरिका और इजरायल आमने-सामने आ गए हैं।

इस बीच, इजरायली बलों ने रफाह की सीमा पर अपनी किलेबंदी और मौजूदगी मजबूत कर ली है। 7 मई को तो इजरायली फौज के कई टैंक रफाह में घुस भी चुके हैं। CNN की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले सप्ताह ही जो बाइडेन ने 3500 बमों की सप्लाई रोकने पर दस्तखत किए हैं। अमेरिका को इस बात की आशंका थी कि उसकी यह खेप रफाह शहर को बर्बाद कर सकती है। दूसरी तरफ इजरायल ने कहा है कि अमेरिका के बारूद सप्लाई रोकने के बावजूद वह अपने दुश्मनों को खत्म करके ही दम लेगा। भले ही उसके लिए उसे नाखूनों से ही दुश्मनों को क्यों ना नोचना पड़े। आईडीएफ के प्रवक्ता डैनियल हगारी ने कहा कि इजरायल के पास पहले से ही वे हथियार हैं जिनकी उसे अपने मिशनों के लिए जरूरत है।

दरअसल, जो बाइडेन प्रशासन को ऐसी उम्मीद थी कि युद्धविराम समझौते के तहत इजरायल-हमास की जंग खत्म हो जाएगी लेकिन इजरायल ने उसे भी मानने से इनकार कर दिया और गाजा के दक्षिणी शहर रफाह,जहां गाजा की 22 लाख की आबादी का अधिकांश हिस्सा शरण लिए हुए है, और लोग कई तंबुओं में शरण लिए हुए हैं, उसे हमास के आतंकियों के खात्मे के बाहने इजरायल तबाह करना चाहता है। 

इससे बाइडेन प्रशासन को कई फिलिस्तीन समर्थक देशों और संगठनों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है और मौजूदा विरोध-प्रदर्शन की आग और भड़क सकती है। चूंकि इस साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं, इसलिए जो बाइडेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अगर मध्य-पूर्व का ये मसला नहीं सुलझा तो बाइडेन को चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।