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तालिबान को SAARC में शामिल कराने की मांग पर अकेला पड़ा पाकिस्तान, नेपाल ने भी सुनाई दो टूक

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Published By: Himanshu Jha
Wed, 22 Sep 2021 11:45 AM
तालिबान को SAARC में शामिल कराने की मांग पर अकेला पड़ा पाकिस्तान, नेपाल ने भी सुनाई दो टूक

तालिबान के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की शनिवार की होने वाली बैठक में एक सीट देने की अनुमति को अस्वीकार कर दिया। सार्क की अगुआई कर रहे नेपाल ने भी पाकिस्तान की इस मांग को ठुकरा दिया है। नेपाल ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान की अपदस्थ सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले गुलाम इसाकजई को लिखित आश्वासन प्रदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सूत्रों ने कहा कि सार्क सदस्य पाकिस्तान के अनुरोध पर आम सहमति तक नहीं पहुंच सके या तालिबान की गारंटी नहीं दे सके कि वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाली बैठक में शामिल हो सकता है। इसके कारण आठ दक्षिण एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक रद्द कर दी गई। सार्क में बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान शामिल है।

भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि पाकिस्तान ने तालिबान को बैठक में शामिल होने पर जोर दिया, लेकिन कोई अन्य देश इस मांग पर सहमत नहीं हुआ।

तालिबान को भारत ने अफगान लोगों के प्रतिनिधि के रूप में मान्यता नहीं दी है। इसे अन्य देशों द्वारा भी मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके नए कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्यों को अभी भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा काली सूची में डाला गया है। अधिकांश अमेरिकी एजेंसियों द्वारा 'वांटेड' लिस्ट में हैं। यहां तक कि, रूस और चीन ने भी अभी तक तालिबान को मान्यता नहीं दी है।

भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि तालिबान शासन के पास कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समूह वैश्विक प्लेटफार्मों पर बोलने का दावा नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि तालिबान के समर्थन के साथ पाकिस्तान की "दाई-पत्नी" की भूमिका उजागर हो चुकी है।

तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव को भी पत्र लिखकर इस सप्ताह न्यूयॉर्क में 76वीं महासभा को संबोधित करने की अनुमति मांगी है। दोहा स्थित प्रवक्ता सुहैल शाहीन को अफगानिस्तान के संयुक्त राष्ट्र के राजदूत के रूप में नामित किया गया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट है कि इस कदम से गुलाम इसाकजई के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। इस बात की संभावना कम है कि यूएनजीएम में भी तालिबान को अनुमति दी जाएगी।

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