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एग्जिट फी के नाम पर वूसली जा रही मोटी रकम, कैसे अफगान शरणार्थियों को लूट रहा पाकिस्तान

राजनयिक ने बताया, 'यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी, अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन की ओर से भी उठाया गया। इस पर मुख्यालयों में भी चर्चा हुई है। पाकिस्तानी अधिकारियों के समक्ष भी विरोध जताया।'

एग्जिट फी के नाम पर वूसली जा रही मोटी रकम, कैसे अफगान शरणार्थियों को लूट रहा पाकिस्तान
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,इस्लामाबादWed, 22 Nov 2023 09:19 PM
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तालिबान के उत्पीड़न से भागने वाले अफगानों पर 'एग्जिट फी' लगाने को लेकर पाकिस्तान घिर गया है। दरअसल, पाक सरकार नकदी की कमी से जूझ रही है। ऐसे में पाकिस्तान उन शरणार्थियों को निशाना बना रहा है जो पुनर्वास योजनाओं के तहत पश्चिमी देशों में जाने की ताक में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे लेकर हर एक शरणार्थी से करीब 830 डॉलर वसूला जा रहा है। पश्चिमी राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र ने इसकी निंदा की है और इसे हैरान करने वाला व निराशाजनक बताया है। पश्चिमी राजनयिक ने कहा, 'पाकिस्तान के लिए यह आर्थिक रूप से बहुत कठिन है, मगर शरणार्थियों से पैसा कमाने की कोशिश सही नहीं है।'

राजनयिक ने बताया, 'यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन की ओर से भी उठाया गया है। इस पर मुख्यालयों में भी चर्चा हुई है। साथ ही पाकिस्तानी अधिकारियों के समक्ष भी विरोध जताया गया है। पाकिस्तान की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब उसने अफगान शरणार्थियों के लिए देश छोड़ने की समय सीमा 1 नवंबर तय कर दी थी। समय सीमा समाप्त होने के बाद पाकिस्तान ने बिना दस्तावेज वाले अफगानों का बड़े पैमाने पर निर्वासन किया है।

यूएस और यूके ने अफगानों को बसाने का बताया प्लान
2021 में तालिबान की ओर से अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से ही एक्सपायर्ड वीजा या गलत दस्तावेजों के साथ हजारों अफगान पाकिस्तान में रह रहे हैं। इनमें से बहुत सारे लोग पश्चिमी देशों में अपना काम शुरू करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। मानवीय आधार पर ज्यादातर लोग पश्चिमी देशों में बसने के पात्र भी हैं। मालूम हो कि ब्रिटिश सरकार ने अफगानिस्तान से 20,000 लोगों को बसाने की योजना बनाई है, वहीं अमेरिका की बाइडन गवर्नमेंट 25,000 अफगानों को बसाने पर सहमत हुई है। नियम के अनुसार, अफगान शरणार्थी केवल क्रेडिट कार्ड से ही 830 डॉलर का भुगतान कर सकते हैं। भले ही उनमें से अधिकांश के पास क्रेडिट कार्ड नहीं है।

आखिर एग्जिट फी लगाने की क्या जरूरत: अधिकारी
अधिकारियों ने इस एग्जिट फी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने बताया गया कि शुरुआती योजना तो 1,000 डॉलर चार्ज करने की थी, मगर बाद में यह राशि घटाकर 830 डॉलर कर दी गई। उन्होंने कहा कि यह हैरान करने वाला मामला है और इससे गहरी निराशा होती है। ऑफिसर ने कहा, 'अगर पाकिस्तान पश्चिम में शरणार्थियों के बसने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना चाहता है तो उसे ऐसी बेतुकी शर्तें नहीं लगानी चाहिए। ऐसे में यह प्रॉसेस और भी ज्यादा जटिल हो जाता है। आखिर इस निकास परमिट फी की क्या जरूरत है? यह तो साफ तौर पर सारा पैसा कमाने के लिए हो रहा है।'

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