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PoK में पाक ने बना दिया 'मौत का कुआं', खतरा देख बंद करना पड़ा नीलम-झेलम प्रोजेक्ट

पीओके में पाकिस्तान का नीलम झेलम प्रोजेक्ट 90 फीसदी जमीन के अंदर है। ऐसे में यह मौत की कुआं की तरह है जो कि कभी भी बड़े हादसे का कारण भी हो सकता है।

PoK में पाक ने बना दिया 'मौत का कुआं',  खतरा देख बंद करना पड़ा नीलम-झेलम प्रोजेक्ट
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,इस्लामाबादFri, 03 May 2024 10:52 AM
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पाकिस्तान ने एक बार फिर पीओके में बन रहे नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का काम बंद कर दिया है। पाकिस्तान की वॉटर ऐंड पावर डिवेलपमेंट अथॉरिटी (WAPDA) ने 500 अरब रुपये के इस प्रोजेक्ट पर काम रोकने का ऐलान किया है। बता दें कि इस बांध में कई सुरंगें हैं। स्थानीय लोग इसका पहले भी विरोध कर चुके हैं. इसके चलते 2022 में भी एक बार इस प्रोजेक्ट का काम रोक दिया गया था। वहीं पाकिस्तान को इसी प्रोजेक्ट से बड़ी मात्रा में बिजली मिलती है। ऐसे में इसका ऑपरेशन रुकने से पाक में बिजली का संकट गहरा जाता है। वहीं यह प्रोजेक्ट मौत के कुएं से कम नहीं है। पहले ही इसकी दीवारों में दरारें देखी गई थीं जिसकी रिपेयरिंग करवाई गई है। वहीं एक बार फिर इस प्रोजेक्ट में कोई खामी नजर आई है जिसके चलते काम रोका गया है। हालांकि अथॉरिटी की तरफ से यह नहीं बताया गया है कि इसमें क्या दिक्कत आई है।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक प्रोजेक्ट को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय जानकारों से सलाह ली जाएगी और इसमें आई खामी को सुधारने की कोशिश की जाएगी। दरअसल 2 अप्रैल को ही इसमें एक सुरंग में पानी के दबाव में बदलाव देखा गया था। जानकारों ने बताया कि 6 अप्रैल को ही 530 मेगावॉट विद्युत संयंत्र को बंद कर दिया गया था। इसके बाद 29 अप्रैल तक इसे सीमित कपैसिटी के साथ चलाया गया। हालांकि अब पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। 

29 अप्रैल के बाद इस हेडरेस सुरंग में और ज्यादा प्रेशर बदलने लगा था। खतरे को देखते हुए 1 मई को सुबह प्लांट पूरी तरह बंद कर दिया गया।अब चर्चा है कि 48 किलोमीटर लंबी सुरंग को डीवाटर किया जाएगा। इसके बाद टनल और पूरे प्रोजेक्ट की जांच की जाएगी। बता दें कि इस प्रोजेक्ट का 90 फीसदी हिस्सा अंडरग्राउंड है। इसमें 51.5 किलोमीटर लंबा टनल सिस्टम बनाया गया है। जिसमें से 48 किलोमीटर लंबी हेडरेस है और 3.5 किलोमीटर की टेलरेस है। 

जुलाई 2022 में बड़ी दरारें नजर आने के बाद प्रोजेक्ट को  बंद कर दिया गया था। रिपेयरिंग में 13 महीने का समय लगा था। अगस्त 2023 में एक बार फिर विद्युत का उत्पादन शुरू किया गया। 28 मार्च को ही इसकी कपैसिटी 969 मेगावाट पहुंची थी और 2 अप्रैल को फिर से दिक्कत आ गई। पूरी क्षमता से चलने के बाद ही  सुरंग में क्रैक दिखने लगे। पहले लगा कि इस कमी को दूर कर लिया जाएगा लेकिन काम बहुत ज्यादा था। 

बता दें कि इससे पहले जब टनल को रिपेयर किया गया था तो इसमें 6 अरब की लागत आई थी। वहीं पाकिस्तान को 37 अरब रुपये की बिजली का नुकसान उठाना पडद़ा था। WAPDA ने 43 अरब का इंश्योरेंस क्लेम किया था।