पाकिस्तान को जाने वाले पानी में प्रवाह घटने से आई भारी कमी
पाकिस्तान को जाने वाले पानी में प्रवाह घटने से आई भारी कमी------------------------------------- बीते एक साल में गैर मानसून मौसम में पाकिस्तान में खाली रह गए कई बांध व नहरें - अकेले चिनाब से इस साल मई...

पाकिस्तान को जाने वाले पानी में प्रवाह घटने से आई भारी कमी------------------------------------ - बीते एक साल में गैर मानसून मौसम में पाकिस्तान में खाली रह गए कई बांध व नहरें
सिंधु जल समझौता और पाकिस्तान की समस्याएँ
- अकेले चिनाब से इस साल मई में 16000 क्यूसेक पानी कम छोड़ा गया
पानी की कमी का प्रभाव
-आपरेशन सिंदूर से पहले पाक को मिलता था लगभग 46000 क्यूसेक पानी
भविष्य में संभावित संकट
-चिनाब-ब्यास टनल का काम अगले माह होगा शुरू, 2029 होगा पूरा
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नईदिल्ली। विशेष संवाददाता
सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के बाद पाकिस्तान की परेशानियां लगाताग बढ़ रही है। आपरेशन सिंदूर के बाद सिंधु बेसिन से पाकिस्तान को जाने वाले पानी में लगभग 17 फीसद की कमी आई है। चूंकि यह कमी गैर मानसून मौसम में आ रही है, जिससे पाकिस्तान की खेती काफी प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर दुनिया भर में रोना रो रहा है और युद्ध करने जैसी गीदड़ भभकियां भी दे रहा है।
पाकिस्तान के आंकड़े
चूंकि भारत सिंधु बेसिन को लेकर कोई आंकड़े न तो जारी कर रहा है और न ही साझा कर रहा है। इसिलए अब पाकिस्तान खुद ही आंकड़े जारी कर बता रहा है कि उसका पानी कितना कम रह गया है। पाकिस्तान के इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान को भारत की तरफ सिंधु बेसिन से मिलने वाला औसत जल प्रवाह जो पहले 46000–48000 क्यूसेक हुआ करता था उसमें भारी गिरावट दर्ज की गई है। सुकुर बैराज जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़ी नहरों में पानी का स्तर 38 फीसद से लेकर 82 फीसद तक गिर चुका है।
फसलों पर असर
इससे पाकिस्तान में पानी की कमी के कारण सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उसके मंगला और तारबेला जैसे बड़े जल विद्युत बनाने वाले बांधों में पानी का स्तर अत्यधिक नीचे चला गया है। सिंध और बलूचिस्तान जैसे प्रांत आरोप लगा रहे हैं कि पंजाब अपने हिस्से से अधिक पानी का इस्तेमाल कर रहा है जिससे देश में अंदरूनी झगड़ा बढ़ गया है।
पानी का प्रवाह और चिनाब नदी
पाकिस्तान के सिंधु जल आयोग के आयुक्त के अनुसार इस साल मई में करीब 16000 क्यूसेक कम पानी छोड़ा गया। यह सिर्फ चिनाब नदी का आंकड़ा है। उसका यह भी कहना है कि भारत ने चिनाब नदी के पानी को व्यास की तरफ मोड़ दिया, जिसकी वजह से पानी का प्रवाह कम हो गया है। पाकिस्तान के मराला पर मई 2025 में चिनाब नदी का प्रवाह बिना वर्षा के 78276 क्यूसेक से घटकर 1527 क्यूसेक रह गया था। इसके बाद दिसंबर में यह और अधिक घटकर 870 क्यूसेक तक पहुंच गया। इस साल भी पानी रोकने के निर्णय का प्रभाव देखा गया। मई 2026 में भी मराला के पास पानी का प्रवाह 21887 से घटकर 5689 क्यूसेक रह गया था। आपरेशन सिंदूर में भारत के पानी रोकने के फैसले से पहले पाकिस्तान को औसतन 46000 से 48000 क्यूसेक पानी मिलता था।
भविष्य की योजनाएँ
चिनाब नदी के पानी को ब्यास में लाने के लिए बनाई जा रही सुरंग का काम अगले महीने शुरू होने जा रहा है। लगभग 2300 करोड़ रुपए की लागत से 8.7 किमी लंबी सुरंग के 2029 तक पूरा होने की संभावना है। इसके बाद पाकिस्तान की दिक्कतें और ज्यादा बढ़ जाएंगी, क्योंकि तब तक भारत इस पानी के अपने राज्यों में ज्यादा इस्तेमाल की प्रणाली भी बना चुका होगा। तब हालाता बदलने पर भी भारत पाकिस्तान को पानी नहीं दे सकेगा। भारत ने सिंधु बेसिन के पानी का एक बड़ा हिस्सा राजस्थान में पहले से ज्यादा और उत्तर प्रदेश तक लाने की तैयारी कर रखी है और यह काम भी अगले तीन सालों में पूरा होने की उम्मीद है।
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