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PAK में फिर अटकी सरकार बनाने की गाड़ी, अब बिलावल की नवाज से ही ठनी? बोले-अपनी शर्तों पर ही करूंगा समर्थन

पाकिस्तान में सरकार बनाने की गाड़ी अटक गई है। बिलावल भुट्टो का कहना है कि उनकी नवाज शरीफ की पार्टी से बात चल रही थी लेकिन, वे अपनी शर्तों से समझौता नहीं करेंगे।

PAK में फिर अटकी सरकार बनाने की गाड़ी, अब बिलावल की नवाज से ही ठनी? बोले-अपनी शर्तों पर ही करूंगा समर्थन
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,इस्लामाबादTue, 20 Feb 2024 08:02 PM
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पाकिस्तान में 8 फरवरी को हुए लोकसभा चुनाव के इतने दिन बाद भी सरकार कौन बनाने जा रहा है, इस पर से पर्दा नहीं उठ पाया है। पहले जहां नवाज शरीफ और जेल में बैठे इमरान खान अपनी-अपनी सरकार बनाने का दावा कर रहे थे, अब वे दोनों विपक्ष पर बैठने के लिए आतुर हैं। पाकिस्तान में सरकार बनाने की गाड़ी अटक गई है। बिलावल भुट्टो जरदारी का कहना है कि उनकी नवाज शरीफ की पार्टी से बात चल रही थी लेकिन, वे अपनी शर्तों से समझौता नहीं करेंगे। बिलावल के तेवरों से पता लगता है कि उनकी नवाज से ही ठन गई है। 

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो-जरदारी ने मंगलवार को कहा कि उन्हें पाकिस्तान में नई सरकार के गठन में 'गतिरोध' की आशंका है और वे सिर्फ सरकान बनाने की नीयत से अपना कोई रुख बदलने के लिए तैयार नहीं है।

बिलावल की टिप्पणी देश की प्रमुख पार्टियों- पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच नवीनतम दौर की बातचीत के बेनतीजा होने के एक दिन बाद आई है। 8 फरवरी के चुनाव में खंडित जनादेश के बाद दोनों पार्टियां केंद्र में गठबंधन सरकार बनाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

बिलावल और नवाज में क्यों ठनी?
सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर पीपीपी पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ की पीएमएल-एन को समर्थन देने के लिए राष्ट्रपति, सीनेट के अध्यक्ष और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जैसे प्रमुख संवैधानिक पदों की मांग कर रही है लेकिन, नवाज इस शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

अपनी शर्तों पर नवाज को समर्थन दूंगाः बिलावल
पत्रकारों से बात करते हुए, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल ने कहा कि पीपीपी और वह अपने रुख पर अड़े हुए हैं, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इसे किसी भी कीमत पर नहीं बदला जाएगा। कहा, “अगर कोई और अपना रुख बदलना चाहता है, तो प्रगति हो सकती है लेकिन वे अपनी शर्तों को बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए मुझे गतिरोध की आशंका है।'' पीपीपी प्रमुख ने कहा कि गतिरोध से लोकतंत्र या संसदीय प्रणाली को कोई फायदा नहीं होगा। बिलावल ने कहा, ''अगर मैं पीएमएल-एन को साथ देना चाहता हूं तो मुझे अपनी शर्तों पर देना होगा, उनकी शर्तों पर नहीं।''

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