तालिबान की भारत से अपील, कम से कम दूतावास के कांसुलर सेक्शन को शुरू करे दिल्ली

अफगानिस्तान तालिबान सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहार बल्खी ने कहा है भारत काबुल में अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के मुताबिक कम से कम दूतावास के कांसुलर सेक्शन को खोल सकता है।

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Aditya Kumar लाइव हिन्दुस्तान , नई दिल्ली
Last Modified: Thu, 19 May 2022 1:07 PM

अफगानिस्तान तालिबान सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहार बल्खी ने कहा है कि तालिबान के पास भारत के साथ खुले संचार चैनल हैं। विऑन की एक रिपोर्ट बताती है कि बल्खी ने कहा है कि भारत काबुल में अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के मुताबिक कम से कम दूतावास के कांसुलर सेक्शन को खोल सकता है क्योंकि हम एक इंटर-कनेक्टेड दुनिया में रहते हैं।

बता दें कि अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत ने अपना दूतावास बंद कर दिया था। हालांकि दूतावास बंद करने के बाद भी भारत ने कई तरह से अफगानिस्तान के लोगों की मदद की है। भारत ने अफगानिस्तान को कई टन गेहूं भेजे हैं। इसके साथ ही भारत ने कोविड के टीके और अन्य दवाइयां भी अफगानिस्तान भेजी हैं।

भारत से चाहते हैं सकारात्मक संबंध, बोला तालिबान

विऑन के साथ बातचीत में बल्खी ने कहा है कि हम भारत सहित सभी देशों के साथ पारस्परिक सम्मान और हितों के आधार पर सकारात्मक संबंध चाहते हैं। हम भारत द्वारा अफगान लोगों को प्रदान की गई मानवीय सहायता की सराहना करते हैं और इसे सद्भावना के रूप में देखते हैं। हम उन लोगों को हमेशा याद रखेंगे जिन्होंने हमारी जरूरत के समय अफगानिस्तान की मदद की। हमारे पास भारत के साथ खुले संचार चैनल हैं और कई मौकों पर हम भारतीय प्रतिनिधियों से मिल चुके हैं।

तालिबान की अपील- काबुल दूतावास शुरू करे भारत

भारत द्वारा काबुल में दूतावास फिर से शुरू करने को लेकर उन्होंने कहा कि हमने सभी देशों से दूतावासों को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है ताकि आपसी हितों और चिंताओं को सीधे बेहतर तरीके से संबोधित किया जा सके। लेकिन भारत को अगर पूरी तरह से दूतावास को खोलने को लेकर आपत्ति है, तो वे कम से कम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के मुताबिक दूतावास के कांसुलर सेक्शन को खोलने पर विचार कर सकते हैं।

पाकिस्तान और भारत को लेकर भी रखी बात

बल्खी ने कहा है कि दो देशों के बीच अच्छे संबंध होने का मतलब यह नहीं है कि कोई तीसरा देश एक ही समय में दोनों देशों के साथ सकारात्मक संबंध नहीं बना सकता है। अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों को लेकर उन्होंने कहा है कि तालिबान राज में हिंदू और सिख समुदाय पिछले दो दशकों की तुलना में अधिक सुरक्षित हैं। हमने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की है जिसे हड़प लिया गया था।

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