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चीन को कनाडा ने बुरी तरह चिढ़ाया, तिब्बत पर संसद में प्रस्ताव पास; क्या करेगा ड्रैगन

कनाडा की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस में एक प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि तिब्बत को एक अलग देश के तौर पर खुद तय करने का अधिकार है कि वह किसके साथ रहना चाहता है।

चीन को कनाडा ने बुरी तरह चिढ़ाया, तिब्बत पर संसद में प्रस्ताव पास; क्या करेगा ड्रैगन
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 11 Jun 2024 12:01 PM
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खालिस्तान के मामले में भारत से नाराजगी झेल रहे कनाडा ने अब चीन को उकसाया है। कनाडा की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस में एक प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि तिब्बत को खुद तय करने का अधिकार है कि वह किसके साथ रहना चाहता है। तिब्बत पर 7 दशकों से चीन का अवैध कब्जा है और वह चाइना पॉलिसी के तहत अब अपने ही देश का हिस्सा मानता है। हालांकि तिब्बतियों का एक बड़ा समूह निर्वासित है और अकसर चीन के खिलाफ आंदोलन करता रहता है। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा समेत हजारों लोग भारत में भी हैं, जो अकसर चीन के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं।

कनाडा की संसद में सांसद एलेक्सिस ब्रुनेले-ड्यूसेपे ने प्रस्ताव पेश किया था, जिसे सोमवार को मंजूर कर लिया गया। सदन में मौजूद सभी सांसदों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। हालांकि जिस दौरान यह प्रस्ताव लाया गया, उस वक्त सदन में पीएम जस्टिन ट्रूडो नहीं थे। एक अन्य सांसद जूली विग्नोला ने एक्स पर लिखा, 'आज इस प्रस्ताव को एक साल की बहस के बाद मंजूर कर लिया गया।' वहीं कनाडा तिब्बत कमेटी ने लिखा कि हमें खुशी है कि कनाडा की संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि तिब्बत को अपने बारे में खुद फैसला लेने का अधिकार है। 

संसद में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि चीन ने तिब्बत पर अवैध कब्जा किया है। इसके अलावा अपनी साम्राज्यवादी नीति के तहत वहां के कल्चर को भी खत्म किया जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि इस प्रस्ताव में तिब्बत के लोगों को एक अलग मुल्क के तौर पर माना गया है और उन्हें अपने बारे में फैसले का अधिकार दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया, 'तिब्बतियों को अधिकार है कि वे अपनी आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक नीतियों को चुन सकें। इसमें किसी बाहरी ताकत को दखल देने का अधिकार नहीं होना चाहिए।'

कहा- चीन के मिथ्या प्रचार से मुकाबले में भी करेंगे मदद

यही नहीं प्रस्ताव में यहां तक कहा गया है कि चीन को कोई अधिकार नहीं है कि वह दलाई लामा के उत्तराधिकारी की प्रक्रिया में कोई दखल दे। यही नहीं प्रस्ताव में यहां तक कहा गया है कि हम तिब्बतियों की उस प्रचार से निपटने में मदद करेंगे, जिसके तहत चीन कहता है कि तिब्बत उसका ही हिस्सा है। बता दें कि 1950 में तिब्बत पर चीन ने कब्जा जमा लिया था। एक अन्य सांसद ने कहा कि कनाडा का यह प्रस्ताव बेहद अहम है। मानवाधिकारों की रक्षा के लिए यह जरूरी है। इस प्रस्ताव को हमेशा सरकारी रिकॉर्ड में रखा जाएगा।