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कोरियाई तानाशाह की घटिया और बेतुकी हरकत, पड़ोसी देश में भेजे कचरे से भरे गुब्बारे, दक्षिण कोरिया उठाएगा बड़ा कदम

तानाशाह किम जोंग उन की सनक से इन दिनों पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया में दहशत का आलम है। उ. कोरिया अब तक हजार से ज्यादा कचरे से भरे हुए गुब्बारे भेज चुका है। जानिए दक्षिण कोरिया ने अब क्या कदम उठाया ?

कोरियाई तानाशाह की घटिया और बेतुकी हरकत, पड़ोसी देश में भेजे कचरे से भरे गुब्बारे, दक्षिण कोरिया उठाएगा बड़ा कदम
Ratanएएफपी,सियोलMon, 03 Jun 2024 04:48 PM
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उत्तर कोरिया ने पिछले मंगलवार से अब तक पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया में एक हजार से अधिक गुब्बारे उड़ाए हैं। इन गुब्बारों में कचरा भरा हुआ है। इस कचरे में सिगरेट के टुकड़े, फटे-पुराने-सड़े कपड़े, प्लास्टिक के टुकड़े, रद्दी कागज और खाद भरी हुई है। दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि अब तक इन गुब्बारों में खतरनाक पदार्थ नहीं मिला है। लेकिन हमने अपने नागरिकों को इन गुब्बारों और उनसे निकले कचरे से दूर रहने की हिदायत दी है। 

तानाशाह किम की घटिया और बेतुकी हरकत
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को पूरी दुनिया में अजीब तरह के शौक और दिल दहला देने वाली हरकतों और कारनामों के लिए जाना जाता है। उसके द्वारा अपने पड़ोसी देश में कचरा भरे गुब्बारे भेजना इसी का उदाहरण है। इस पर पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया का कहना है कि परमाणू हथियार रखने वाले एक देश के लिए इस तरह की हरकतें बेहद घटिया और बेतुकी हैं। इसी के साथ दक्षिण कोरिया ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर किम जोंग उन ने इस तरह की घटिया हरकतें करना बंद नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। 

यूएन के नियमों का उलंघन नहीं, लेकिन युद्धविराम समझौते के विपरीत
लगातार बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करने वाले किम जोंग उन की दक्षिण कोरिया में इस तरह के कचरा भरे गुब्बारे भेजने वाली हरकत को संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उलंघन नहीं बताया जा रहा है। लेकिन दक्षिण कोरिया ने आगाह किया है कि यह उस समझौते का उलंघन है जो 1950-53 में कोरियाई युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति समझौते के तहत किया गया था। 

दक्षिण कोरिया नें शांति समझौता निलंबित करने की करी घोषणा
उत्तर कोरिया को बार-बार हिदायतें दी गईं, लेकिन किम जोंग उन ने कचरा भरे गुब्बारे भेजना बंद नहीं किया। इससे नाराज दक्षिण कोरिया ने दण्ड देने के लिए दोनों देशों के बीच हुए शांति समझौते को रद्द करने की बात कही है। यह समझौता साल 2018 में हुआ अंतर-कोरियाई समझौता है। इसका उद्देश्य दोनो कोरियाई देशों के बीच आपसी विश्वास को बहाल रखना है। सीमा पर किसी भी तरह की शत्रुता को बढ़ाना से रोकना है।