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नेपाल में एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए चीनी कंपनी को मिले ठेके पर कोर्ट की रोक, भारतीय कंपनी ने किया है केस

नेपाल में एक एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट बनाने के ठेके को लेकर चीनी कंपनी पर रोक लगा दी गई है। भारतीय कंपनी ने इसमें पारदर्शिता को लेकर नेपाली सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

नेपाल में एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए चीनी कंपनी को मिले ठेके पर कोर्ट की रोक, भारतीय कंपनी ने किया है केस
Ankit Ojhaरेजाउल एच लस्कर, हिंदुस्तान टाइम्स,बीजिंगMon, 28 Nov 2022 09:56 PM

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चीन की विस्तारवादी नीति और चालबाजी कोई नई नहीं है। पड़ोसी देशों में अपना मकड़ जाल फैलाने में चीन कसर नहीं छोड़ता है। बात चाहे बांग्लादेश की तीस्ता रिवर में सर्विलांस शिप तैनत करने की हो या फिर नेपाल के अहम सड़क प्रोजेक्ट को लेकर। हालांकि भारत की नजर चीन के इन सभी कामों पर है। रविवार को नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने चीनी कंपनी के एक सड़क प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है। यह प्रोजेक्ट नेपाल आर्मी ने चाइना फर्स्ट हाइवे इंजिनियर कोऑपरेटिव लिमिटेड को दिया था। यह कॉन्ट्रैक्ट कम से कम 1500 करोड़ रुपये का है। 

मामले के जानकारों का कहना है कि कोर्ट ने भारत की ऐफकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने नेपाल के सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कंपनी ने प्रोजेक्ट की बिडिंग में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए थे। नेपाल आर्मी तेराई-मधेश एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट बनवा रही है। यह प्रोजेक्ट संवेदनशील इसलिए है क्योंकि इसका एक हिस्सा भारतीय सीमा के पास है।  

सितंबर में जब बिडिंग हुई थी तब केवल पांच कंपनियां थीं जिनमें से चार चीनी और एक भारतीय थी। बाद में 6 नवंबर को चाइना फर्स्ट हाइवे इंजिनियरिंग को भी शामिल कर लिया गया और उसे विजेता बना दिया गया। जबकि यह कंपनी पहले की पांच कंपनियों में शामिल नहीं थी। इस दौरान नेपाल आर्मी का वह अधिकारी भी बदल गया जो कि इस प्रोजेक्ट को संभाल रहा था। 

 बांग्लादेश पर भी दबाव बना रहा चीन
कई महीने पहले चीन की तरफ से बांग्लादेश सरकार पर भी दबाव बनाया गया था कि तीस्ता नदी में उसके प्रोजेक्ट के लिए रास्ता आसान किया जाए। इसके जरिए चीन अपना नेविगेशन मजबूत करना चाहता था। बांग्लादेश सरकार को इंताजर था कि परले नदी के पानी के बंटवारे को लेकर भारत के साथ समझौता स्पष्ट हो जाए। वहीं चीन बांग्लादेश पर जल्दी करने का  दबाव  बना रहा था। ॉ

बांग्लादेश में चीनी राजदूत ली जिमिंग बिना भारत का नाम लिए संकेत दिया था कि बीजिंग जिस प्रोजेक्ट में निवेश करना चाहता है वह मामला संवेदनशील है। अगर बांग्लादेश सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर प्रतिबद्धता जताए तो इसमें चीन का फायदा निकल सकता है। वहीं भारत बिल्कुल नहीं चाहता है कि चीन की तरफ से इसमें कोई दखल हो। हिंद महासागर में चीन के दो युआन वांग क्लास की  शिप की तैनाती भी की जानी थी हालांकि अब इसे टाल दिया गया है। अगस्त के मध्य में चीनी पोत को श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट भेजा गया था। तब भी भारत ने इसपर आपत्ति जताई थी।