पहचान न होने से नेपाल में दफनाए जा रहे शव, कोड व डीएनए से शिनाख्त सुरक्षित

हिन्दुस्तान, महाराजगंज
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महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। नेपाल में आई भीषण बाढ़ व भूस्खलन के बाद चलाए जा

पहचान न होने से नेपाल में दफनाए जा रहे शव, कोड व डीएनए से शिनाख्त सुरक्षित

महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। नेपाल में आई भीषण बाढ़ व भूस्खलन के बाद चलाए जा रहे राहत-बचाव अभियानों के बीच मलबे तथा नदी किनारे से बरामद हो रहे अज्ञात शवों का सुरक्षित रख-रखाव व उनकी शिनाख्त सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस भीषण आपदा में अब तक 919 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सुरक्षा बलों ने 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इसके बावजूद हजारों लोग अब भी लापता हैं।

अस्पतालों में क्षमता खत्म, संक्रमण रोकने को उठाया कदम

प्रभावित क्षेत्रों के अस्पतालों व मुर्दाघरों में जगह समाप्त होने के बाद नेपाल सरकार फॉरेंसिक प्रोटोकॉल के तहत शवों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अस्थायी दफन का रास्ता अपना रही है। कई दिनों तक पानी और मलबे में दबे रहने से शव क्षत-विक्षत होने लगे हैं, जिससे प्रभावित इलाकों में महामारी और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।

भविष्य में अपनों की पहचान के लिए सुरक्षित हो रहा डेटा

फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें अंतिम संस्कार से पहले हर शव से डीएनए सैंपल, फिंगरप्रिंट और दंत परीक्षण का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित कर रही हैं। प्रत्येक शव को एक विशिष्ट पहचान कोड दिया जा रहा है, जिसे आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। इसका मकसद यही है कि भविष्य में जब भी पीड़ित परिजन अपने लापता लोगों की तलाश में पहुंचें तो डीएनए मिलान के जरिए अपनों की पहचान संभव हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण कितने शव बरामद हुए हैं?
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 919 से अधिक शव बरामद हुए हैं।
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