बीजिंग में नेपाल के राजदूत बन गए चीनी तोता, भारत की बुराई पर अपनों ने ही घेरा

लाइव हिन्दुस्तान ,काठमांडू Last Modified: Tue, Sep 29 2020. 17:37 IST
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के द्वारा अप्रैल के अंत में अचानक चीन के राजदूत बनाए गए महेंद्र बहादुर पांडे 'चीनी तोता' बन गए हैं। चीन के साथ बेहतर रिश्ते बनाने के लिए बीजिंग भेजे गए राजदूत ड्रैगन के प्रवक्ता के रूप में काम करने लगे हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में जिस तरह उन्होंने एक तरफ चीन की जमकर तारीफ की तो भारत पर नेपाली जमीन कब्जाने सहित कई गंभीर और झूठे आरोप मढ़ डाले। पांडे के इस इंटरव्यू से खुद नेपाल के जानकार और विश्लेषक हैरान हैं और उनकी कूटनीतिक समझ पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

चीन के सरकारी अखबार को दिए इंटरव्यू में महेंद्र बहादुर पांडे ने चीन-नेपाल रिश्तों की तारीफ की और कहा कि भारत के साथ भारतीय और विदेशी मीडिया चीन-नेपाल रिश्तों को खराब करने की कोशिश में है। केपी ओली सरकार ने अप्रैल में अचानक लीलामणी पौडयाल को बीजिंग से वापस बुलाकर पांडे को भेज दिया था। इस बदलाव को लेकर अभी तक कोई कारण नहीं बताया गया है। 

काठमांडू पोस्ट की एक खबर के मुताबिक, महेंद्र बहादुर पांडे के इस इंटरव्यू की नेपाल में तीखी आलोचना हो रही है। विश्लेषक, कूटनीतिज्ञ और राजनीतिक दलों के नेताओं ने पांडे के बयानों को गैरकूटनीतिक एक राजदूत के दायरे से बाहर बताया है, जो कि प्रोटोकॉल के उल्लंघन वाला है। 

शेर बहादुर देबुआ और सुशील कोइराला के विदेश संबंध सलाहकार रहे दिनेश भट्टाराई ने कहा, ''मैं नहीं समझ पाता कि क्यों हमारे राजदूत भारत, चीन या किसी ऐसे देश के पक्ष में बात करते हैं जहां वे सेवा दे रहे हैं। जिस तरह की बात पांडे ने की है वह हमें आसानी से मुश्किल में डाल सकता है। हमें यह समझना चाहिए कि भारत और चीन के साथ हमारे रिश्ते पूरी तरह स्वतंत्र हैं और वे एक दूसरे का स्थान नहीं ले सकते हैं।''

नेपाल का प्रमुख अखबार लिखता है, ''दुनिया की दो उभरती अर्थव्यवस्थाओं भारत और चीन के बीच मौजूद देश के लिए चीन और भारत के बीच बैलेंस बनाना हमेशा कठिन रहा है। विदेश नीति के जानकार हमेश दोनों पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते को देश के हित में बताते हैं, लेकिन ओली सरकार के नीतियों पर एक से ज्यादा बार सवाल उठ चुके हैं।'' 

काठमांडू पोस्ट से पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता ने कहा, ''पांडे सीधा और सपाट बोलने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन कूटनीति में यह हमेशा काम नहीं करता है। यदि पांडे भविष्य में भी इसी तरह बोलते रहे तो वह कई देशों के साथ नेपाल का रिश्ता खराब कर देंगे।'' 

विदेश मामलों के जानकार चंद्र देव भट्ट ने कहा, ''कोई भी कहेगा कि चीन में नेपाल के राजदूत की ओर से दिया गया बयान गैरकूटनीतिक है, लेकिन यदि बारीकी से देखें तो यह बयान नेपाल की विदेश नीति के खिलाफ है। पांडे की ओर से दिए गए सवालों के जवाब देखें तो लगता है कि नेपाल अपने राष्ट्रीय हित की रक्षा में दिलचस्पी नहीं रखता बल्कि दूसरों (चीन) के हितों को पूरा कर रहा है।
 

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