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तालिबान ने अब तक 500 सरकारी अधिकारियों को मारा! अमेरिका की मदद करने का था आरोप

तालिबान ने सैनिकों को माफी देने के नाम पर लुभाया और फिर दी मौत की सजा। रिपोर्ट बताती है कि तालिबान ने सरकारी कर्मचारियों के डेटा को सत्यापित करने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल किया और महीनों तक जांच की

तालिबान ने अब तक 500 सरकारी अधिकारियों को मारा! अमेरिका की मदद करने का था आरोप
Aditya Kumarएएनआई,काबुलWed, 13 Apr 2022 04:51 PM

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काबुल पर कब्जा करने के बाद से अब तक तालिबान ने करीब 500 पूर्व सरकारी अधिकारियों, सैन्य कर्मियों की हत्या कर दी है या किडनैप कर लिया है। ये वे लोग हैं जिनको लेकर माना जाता है कि उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिका की मदद की थी।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जांच के हवाले से बताया है कि तालिबान ने सत्ता पर कब्जा करने के छह महीने के भीतर करीब 500 पूर्व राज्य अधिकारियों और सैन्य कर्मियों की या तो हत्या कर दी गई या वे जबरन गायब हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ बगलान प्रदेश में 86 हत्याओं की पुष्टि की गई है। कंधार में 114 लोग लापता थे।

माफी देने के नाम पर दी मौत की सजा

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ तालिबान ने सैनिकों को माफी देने के नाम पर लुभाया। उन्हें स्थानीय पुलिस मुख्यालय बुलाया और लोगों को मारा-पीटा। कइयों को मारते-मारते मार डाला। कइयों को यह कहते हुए कुएं में फेंक डाला कि तुम कई सालों से हमारे खिलाफ लड़े और हमारे कई बेहतरीन लोगों को मार डाला। यह क्रूरता आज भी जारी है। ये बातें एक पूर्व अफगान सैन्य कमांडर ने रूसी सरकारी न्यूज एजेंसी स्पूतनिक को नाम न छापने की शर्त पर बताया है। 

स्पूतनिक की रिपोर्ट बताती है कि तालिबान ने सरकारी कर्मचारियों के डेटा को सत्यापित करने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल किया और महीनों तक जांच की। जांच में फोरेंसिक वीडियो परीक्षा, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट और पीड़ितों, गवाहों और पीड़ितों के परिवार के सदस्यों के साथ साक्षात्कार शामिल हैं।

प्रतिशोध के डर से हजारों लोगों ने अफगानिस्तान छोड़ा

हालांकि तालिबान ने अधिकारियों की हत्या को लेकर लगातार इनकार कहा है कि ये आरोप निराधार हैं। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि तालिबान को लेकर दुनिया की राय को गुमराह करने के लिए विरोधियों द्वारा इस तरह का प्रचार किया जाता है। बता दें कि काबुल में तालिबान के आने के बाद से अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति बदतर हो गई है। हजारों अफगान नागरिक प्रतिशोध के डर से देश छोड़ चुके हैं।

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