मोसाद ने ईरान के पूर्व राष्ट्रपति को अपना एजेंट बनाया था : रिपोर्ट
फ्लैग... ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए इजरायली खुफिया एजेंसी ने खेला था दांव

वॉशिंगटन, एजेंसी। इजरायली खुफिया एजेंसी 'मोसाद' अपने अभियान को अंजाम देने के किस हद तक जा सकता है उसकी बानगी देखिए। उसने ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को ही अपना एजेंट बना लिया था। इसके बाद शुरू किया सत्ता परिवर्तन का खेल। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इजरायली खुफिया एजेंसी ने ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए वर्षों तक एक गुप्त अभियान चलाया। इसके लिए उसने अहमदीनेजाद से संपर्क स्थापित किया। रिपोर्ट के अनुसार 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे अहमदीनेजाद अपने कार्यकाल के दौरान परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और इजरायल के खिलाफ आक्रामक बयान देने के लिए जाने जाते थे। लेकिन राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद जब उनके संबंध ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान से बिगड़ने लगे, तो इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने उन्हें संभावित सत्ता परिवर्तन के लिए उपयोगी चेहरा मानना शुरू किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तत्कालीन मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने बुडापेस्ट में अहमदीनेजाद से गुप्त मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद मोसाद ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को सूचित किया कि पूर्व ईरानी राष्ट्रपति के साथ संपर्क स्थापित हो गया है। हालांकि, इस रिपोर्ट पर अभी तक इजरायल, ईरान या महमूद अहमदीनेजाद की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है。
सत्ता में वापसी की थी उम्मीद
राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद अहमदीनेजाद ने ईरान की सुरक्षा एजेंसियों की आलोचना की, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और खुद को पहले की तुलना में अधिक उदारवादी नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने पूरे ईरान का दौरा कर अपने समर्थकों से संपर्क बनाए रखा और सत्ता में वापसी की इच्छा भी जताई। रिपोर्ट के मुताबिक अहमदीनेजाद का मानना था कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में उनकी वापसी संभव नहीं है, लेकिन यदि सत्ता व्यवस्था कमजोर पड़ती है तो वह खुद को सुधारवादी नेता के रूप में पेश कर सकते हैं।
खामेनेई से बढ़ती दूरी पर थी नजर
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार इजरायली खुफिया एजेंसियां अहमदीनेजाद और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी पर लगातार नजर रखे हुए थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति उनकी नाराजगी को इजरायल ने एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) अहमदीनेजाद के विदेशी संपर्कों को लेकर सतर्क हो गई थी। खासकर तब जब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को सार्वजनिक पत्र लिखे थे। यह पूरी योजना अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच फरवरी में शुरू हुए सैन्य संघर्ष के शुरुआती चरण में अपने चरम पर पहुंची थी।
फिल्मों जैसी जासूसी कहानी, धरातल पर आई
28 फरवरी को इजरायल के हवाई हमले में अहमदीनेजाद के कंपाउंड को निशाना बनाया गया, जिसमें उनके बॉडीगार्ड्स की बिल्डिंग और उनकी बख्तरबंद गाड़ी को निशाना बनाया गया था। हमले के बाद ईरान के अधिकारियों के मुताबिक एक काली कार वहां पहुंची और अहमदीनेजाद को उसमें बिठाया और अफ़रातफरी वाली उस जगह से तेजी से दूर ले गई।
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