चलते-चलते-- सबसे छोटा ग्रह बुध और तेजी से सिकुड़ रहा
केप कैनावेरल के वैज्ञानिकों ने पाया है कि ग्रह बुध का आकार 30% ज्यादा सिकुड़ रहा है। बुध का व्यास 14 मील (23 किलोमीटर) तक कम हो सकता है, जो उसके गर्म लोहे के कोर के ठंडा होने के कारण है। जापान और यूरोप का बेपीकोलंबो मिशन बुध का अध्ययन करेगा।

केप कैनावेरल, एजेंसी। सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे पास स्थित ग्रह बुध लगातार सिकुड़ रहा है। नए शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि बुध का आकार पहले लगाए गए अनुमान से करीब 30% ज्यादा सिकुड़ रहा है। बुध के व्यास में कुल कमी 14 मील यानी करीब 23 किलोमीटर तक हो सकती है। बुध के अंदर एक बहुत बड़ा और गर्म लोहे का कोर है। यह कोर समय के साथ धीरे-धीरे ठंडा हो रहा है। जब ग्रह के अंदर की गर्मी बाहर निकलती है, तो उसका कोर और उसके आसपास की चट्टानी परतें सिकुड़ने लगती हैं।इस कारण बुध की बाहरी सतह पर भी दबाव पड़ता है और जमीन सिकुड़कर जगह-जगह दरारों और ऊंची चट्टानी संरचनाओं का रूप ले लेती है।
जापान और यूरोप का संयुक्त अंतरिक्ष मिशन बेपीकोलंबो आने वाले समय में बुध की कक्षा में पहुंचकर इसका विस्तृत अध्ययन करेगा। इससे बुध ग्रह को और गहराई से समझने में मदद मिलेगी।


