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भारतीय सैनिकों को निकालने पर नहीं, इकोनॉमी पर ध्यान दें मुइज्जू; पाकिस्तान की राह पर मालदीव

भारत ने मालदीव के साथ दो हेलीकॉप्टर और एक डोर्नियर विमान सहित सैन्य हार्डवेयर भी साझा किया है। ये विमान माल ढोने और लोगों को लाने-ले जाने से लेकर समुद्री निगरानी तक विभिन्न कार्यों में सहायक हैं।

भारतीय सैनिकों को निकालने पर नहीं, इकोनॉमी पर ध्यान दें मुइज्जू; पाकिस्तान की राह पर मालदीव
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,मालेThu, 02 Nov 2023 04:43 PM
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भारत के खिलाफ मुहिम चलाकर सत्ता में आए मालदीव के नए राष्ट्रपति के लिए आगे की राह आसान नहीं होने वाली है। देश के आर्थिक हालात ऐसे हैं कि उन्हें पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 17 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे। पद संभालते ही उन्हें तुरंत उन्हें देश के लोन को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। विश्व बैंक पहले ही मालदीव के बढ़ते विदेशी ऋण भुगतान पर चेतावनी जारी कर चुका है। मौजूदा राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के खिलाफ 30 सितंबर के राष्ट्रपति पद के चुनाव में मुइज्जू की जीत के बमुश्किल एक हफ्ते बाद, विश्व बैंक ने बताया कि 2026 तक, 5.4 बिलियन डॉलर की मालदीव की अर्थव्यवस्था को रिकॉर्ड 1.07 बिलियन डॉलर के विदेशी ऋण का भुगतान करना होगा।

कर्ज पर नहीं, भारतीय सैनिकों पर है फोकस

आर्थिक चुनौतियों और विदेशी कर्ज को चुकाने के बीच, नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू अपने देश से भारत की सैन्य उपस्थिति खत्म करने पर तुले हैं। मुइज्जू का चुनावी अभियान "भारत को बाहर करो" था। अब इसे पूरा करने के उनके दृढ़ संकल्प ने राजनयिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। चुनाव जीतने के बाद से ही मुइज्जू ने बार-बार मालदीव से भारतीय सेना को हटाने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा, "मालदीव से भारतीय सैनिकों को जल्द से जल्द वापस भेजने की डिटेल पर काम करूंगा। इसके लिए मैं भारत के साथ स्पष्ट और विस्तृत राजनयिक परामर्श करूंगा। मसला यहां सैन्य कर्मियों की वास्तविक संख्या पर नहीं है, बल्कि मालदीव में बिल्कुल भी नहीं होने पर है। हम भारत सरकार से चर्चा कर इसके लिए आगे का रास्ता निकालेंगे।"

चीन के करीबी माने जाने वाले मुइज्जू भारत विरोधी बयानबाजी तो कर रहे हैं लेकिन अपने देश के आर्थिक हालात पर शायद ही उतना फोकस कर रहे हैं।  विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट कहती है कि मालदीव को 2022 से 2024 तक विदेशी ऋण चुकाने के लिए प्रति वर्ष औसतन 300 मिलियन डॉलर खर्च करने होंगे। इसने मालदीव के बारे में मौजूदा चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारी बोझ रणनीतिक रूप से स्थित मालदीव को उन एशियाई देशों की कतार में खड़ा कर रहा है जिनके हालात पहले से ही बहुत खराब हैं। इनमें पाकिस्तान और श्रीलंका ऐसे देश हैं जो बाहरी कर्ज के चुंगल में फंसे हैं। सबसे खराब स्थिति हाल ही में पास के श्रीलंका में देखी गई, जहां यह देश पिछले साल डिफॉल्टर हो गया था।

श्रीलंका से ज्यादा मिल रहे मालदीव के हालात

श्रीलंका के हालात मालदीव से ज्यादा मिलते हैं। संसद के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने संसदीय परिसर में एक इंटरव्यू के दौरान कहा, "हम जानते हैं कि श्रीलंका में क्या हुआ, यह सिर्फ अखबारों की सुर्खियों के माध्यम से नहीं, बल्कि इसलिए कि हमारे बीच घनिष्ठ संबंध हैं और हम जानते थे कि आर्थिक पतन ने हमारे करीबी श्रीलंकाई मित्रों को कैसे प्रभावित किया। हमने श्रीलंका से बहुत कुछ सीखा है और हमें सावधान रहना चाहिए।"

विश्व बैंक की चेतावनी के एक सप्ताह बाद, फिच रेटिंग्स ने भी मालदीव के "भारी और बढ़ते सरकारी ऋण बोझ, कम विदेशी मुद्रा भंडार" के चलते इसकी रेटिंग घटा दी थी। वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने कहा कि 2025 में देश को 363 मिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना होगा। मुइज्जू को एक ऐसी अर्थव्यवस्था विरासत में मिली है जिसमें विदेशी भंडार घट रहा है। देश के केंद्रीय बैंक, मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के अनुसार, मध्य वर्ष का आंकड़ा 702.2 मिलियन डॉलर होने का अनुमान लगाया गया था, जो 2023 की शुरुआत में 790 मिलियन डॉलर से कम है। एमएमए के आंकड़ों से पता चलता है कि उसमें से इस्तेमाल योग्य भंडार केवल 168.1 मिलियन डॉलर का अनुमान लगाया गया था, जो भारी आयात पर निर्भर देश में केवल ढाई महीने के आयात के लिए पर्याप्त था।

मालदीव में क्या कर रहे भारतीय सैनिक

ऐसे में मालदीव की सुरक्षा को पुख्ता कर रहे भारतीय सैनिकों को हटाने के मुइज्जू के प्रयास देश के लिए घातक साबित हो सकते हैं। मालदीव में भारतीय सैन्य उपस्थिति कोई नई बात नहीं है, मालदीव की सेना की सहायता के लिए एक सहायता समूह के रूप में लगभग 75 सैन्यकर्मी वहां तैनात हैं। सैन्य इंजीनियरों, प्रशिक्षकों और पायलटों सहित इन कर्मियों ने मालदीव के अपने समकक्षों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत ने मालदीव के साथ दो हेलीकॉप्टर और एक डोर्नियर विमान सहित सैन्य हार्डवेयर भी साझा किया है। ये विमान माल ढोने और लोगों को लाने-ले जाने से लेकर समुद्री निगरानी तक विभिन्न कार्यों में सहायक हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये भारतीय सैन्य कर्मी और विमान मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल के नियंत्रण में काम करते हैं और उनकी उपस्थिति मुख्य रूप से मालदीव की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए है। इसके अलावा, भारत इन विमानों के रखरखाव में आर्थिक रूप से सहायता करता है।

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